Lovely world

Monday, December 31, 2012

अभिनंदन 2013

हार्दिक  अभिनंदन वर्ष 2013 और शुभ विदा 2012 !

2012 की समाप्ति और 2013 के आगमन पर  "अनुभूति "परिवार  की ओर से आप सभी को हार्दिक शुभकामना । 2013 आपके लिए नई उमंग ,नए तरंग और आशा और समृद्धि की ज्योत ले कर आए ।
2012 का वर्ष काफी उतार - चढाव से भरा रहा । सच कहूं तो चढाव से ज्यादा हम  गिर गए । हाँ ,भले ही तरक्की भी की ,देश में खेल की ओर से 6 पदक  आए  और भी बहुत  कुछ , पर  वही दूसरी तरफ राजनितिक उथल पुथल से भरा रहा । 2012 में  सबसे ज्यादा महिला उत्पीडन के मामले दर्ज हुए । "दामिनी" की भयावह मौत 2012 की सबसे दुखद घटना है । देश नव  वर्ष की खुशियों से ज्यादा, इस गम से गमगीन है । सभी न्याय के इंतजार में है ।
आशा  करता हूँ की संविधान में उत्पीडन के मामले में शंसोधन हो । मानव के नैतिक  मूल्यों का ह्रास न हो और उनके चरित्र का विकाश हो , यही कामना लिए "अनुभूति " की ओर से , आपको  नव वर्ष की मुबारकबाद  देता हूँ। "दामिनी" को श्रद्धांजलि !!

आशा है ,नव वर्ष में  नैतिक और आत्मिक समृद्धि का विकाश हो !!!!


Saturday, December 29, 2012

एक दर्द ! असह्य चुभन !!

आइना जो देखोगे ,
जीते जी मर जाओगे ,
पलके ना उठा रहे ,
सरम से झुकी बेशरम आँखे !
दुःख कैसे  ले उसका ,
सीने पे ,जी पाओगे ?

हर पुकार में आह छुपी ,
हर दर्द में सिसकिया  उसी की ,
हर मूक में  आज एक ही भाव !
कतरा कतरा करे सवाल ,
कैसे जी पाओगे ?
दुःख देकर उसको !
ओ  बेशरम !
अब तो हो जा शर्मसार ।


दिलो दिलो में आग लगी है ,
विप्लव करे आह्वान ,
दुःख क्या क्या बयाँ करे वो ,
लुट गई जो उसकी आन ।
जर्रा जर्रा डूबा गम में ,
कैसे जी पाओगे ?
मृत आत्मा और लिए देह बेजान !!

उठो बहनों ,उठो भाइयों ,
जला मशाल सम्मान की ,
ले सपथ , बेबश  नही ,लाचार नहीं,
अंत करे उस अंधेर का ,
जहा नारी सिर्फ एक देह सामान !!
करे स्थापना नए दौर की ,
जहा एक एक  की आबरू ,दूजे की जान !!!
                                                                                                                   !! भास्कर !!
  


Monday, December 17, 2012

उलफत भर, दिल में उनके लिए आ गए  ज़माने को छोड़ के ,
और एक वो थी ,जिनको गवारा ना हुआ देखे नज़रे मोड़ के ।

Friday, October 26, 2012

राधिका -व्यथा

 पनघट पर पनीया भरे गुजरी ,
मोहन ले गुलाल गुलेल बाट टोहे ।
ले मटकी चले ,राधा चाल मतवारी ,
मार कंकड़ मटकी ,तोड़े श्याम बनवारी ।
सर पकडे ,अरज़े राधा,
छोड़ ! काहे छेड़े मोहे बीच राहे ।।

बरबस काहे तंग करे , काहे मोको सताए ,
लाज लीन्ही मोरी ,लाज लीन्ही मोरी ,
काहे मालती बदरंग बनाए ।
कैसो ढीठ लाज़ बिना को , देख  मेरे पिछु -पिछु आए ।
अरज करू ओ! सावरे, काहे  मोको बिन मतलब सताए ?
कासे कहु मै ,मोको गिरिधर कितना सताए?
पकड़त कलईया बरबस ,चुडिया सब झड जावे ।
मतवारो खींचत चुनर , बेसरमी तोहे लाज न आए !
 हार गई पईया पडू तोहे , बिच कड़ी लाज मोरी,
छोड़ ! काहे छेड़े मोहे बीच राहे ।।

मधुर -मधुर बंसी बाजे ,
यमुना तीरे अकेले बुलावे ।
डर लागे , फिर भी लाज त्यागे ,
कैसो कीन्हो जादू ,राधा छिपत -छिपत आवे ।
पडत पईया ,आँखे मूंदे छलकत जावे ,
कर जोड़े , अरज करे ,
काहे खेल खेले लाज से मोरी ,
छोड़ ! काहे छेड़े मोहे बीच राहे ।
काहे मोको इतना सतावे !!

                                                                                                      ।।भास्कर ।।

 

Sunday, October 21, 2012

जिन्दगी को जीने का ख्याल आता है !

अब जिन्दगी को जीने का ख्याल आता है !
अब जिन्दगी को जीने का ख्याल आता है !
पल भर में हर गम गुम जाता है ,
हर सुख से वो  खुसहाल  जाता है ।
देखता  नहीं किसी उंच -गहराई को ,
थोड़ी सी धुप में ,ठण्ड की चुभन भूल जाता है ।
देखते ही मन में बन जाता है  दीपक ,
फैलता तो है किरन ,
खुद की परछाई  को क्यों भूल जाता है ?
आज जिन्दगी को ऐसे ही  जीने का  ख्याल आता है ।
चाहता तो  उस मुकाम मुकाम को है ,
जीसे ना नजरो से छु पाता  है ।
इच्छाए तो बहुत सी दबी है दिल में ,
खाव्बो की पोटरी  ना खोल पाता है ।
पल पल पल हर पल हर पल
हर पल नए पल का ख्याल अब खा जाता है ।
क्या कहे अब  ऐसे ही जिन्दगी को जीने का  ख्याल आता है ।।

Tuesday, October 16, 2012

दुर्गे देवि नमोऽस्तु ते ||



सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके
शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते


आज से माँ जगदम्बा के नौ  रूपो  की स्तुति और आराधना   श्रधा और भक्ति के साथ आरम्भ होती है । भगवती के 9 स्वरूपों की अर्चना का आज प्रथम दिन है ।प्रथम  माँ  शैलपुत्री की आराधना की जाती है । जगत्जननी के  पर्वत राज हिमालय के  जनम लेने के कारण उनका नाम शैलपुत्री पड़ा ।
इन 9 दिनों में जननी के ब्रह्मचारिणी  ,चंद्रघंटा ,कुष्मांडा ,स्कंदमाता ,कात्यायनी ,कालरात्रि (काली) ,महागौरी  रूपों की आराधना की जाती  है।
हर रूप में माँ जगदम्बा   ने धरती पर अवतरित हो कर   दुराचारी शक्तियों का नाश कर धर्म और सत्य की स्थापना की ।
माँ दुर्गा का अवतरण दुष्ट दैत्य महिसासुर  के अधर्म और पाप से सृष्टी की रक्षा के लिए हुआ ।
नवरात्रा पर्व हमें सत्य और धर्म के महत्व और  उसके अनुसरण का मार्ग दर्शाता है । सर्वदा सत्य और धर्म की विजय हो !  
सृष्टिस्थितिविनाशानां शक्ति भूते सनातनि।
गुणाश्रये गुणमये नारायणि नमोऽस्तु ते॥

माँ जगदम्बा आपकी सभी  मनोकामना पूर्ण करे और सदा सुख समृधि से आपके जीवन को उज्वल करे।
समस्त भारतवाशियो को शारदीय नवरात्रा(वर्ष  की हार्दिक शुभकामना ।
माँ जगदम्बा की जय ।
देव्या यया ततमिदं जगदात्मशक्त्या , निश्शेषदेवगणशक्ति समूहमूत्र्या।
तामम्बिकामखिलदेवमहर्षिपूज्यां , भक्त्या नता: स्म विदधातु शुभानि सा न:॥

सम्पूर्ण देवताओं की शक्ति का समुदाय ही जिनका स्वरूप है तथा जिन देवी ने अपनी शक्ति से सम्पूर्ण जगत् को व्याप्त कर रखा है, समस्त देवताओं और महर्षियों की पूजनीया उन जगदम्बा को हम भक्ति पूर्वक नमस्कार करते हैं। वे हमलोगों का कल्याण करें। 
 

Thursday, September 20, 2012

सोच

काहे को सोचे बन्धु  तेरे जीवन  में गम है है,
सोच तेरा हर गम ही कम है ।
देख उनको जो गमगीन है ख़ुसिओं में भी ,
क्या तेरी एक ख़ुशी उनकी खुशीओ  से कम है ?


Monday, June 25, 2012

वो

लुट कर मेरी नींद और सुकून चलती बनी वो,
और पुछा तो उससे तो कहा
मै तो हमेशा से बाहें फैलाये तेरे पीछे खड़ी थी ,तुमने मुड कर देखा ही नहीं

ज़रा सोचिये

अगर दोस्तों से ही जिंदगी हसीन होती तो भला हमे दुश्मनो की जरूरत क्यों पड़ती ???

Thursday, June 07, 2012

It’s time to move on.

It's time to move on.

All the past has gone

It’s the time to move on,

Don’t look so behind,

Try to look forward which is in hide.

You can do it,

Something is waiting for u.

Understand the fact that u can do.

Come on! It’s the time to move on.

Happiness looking for,

It’s a call for cover.

Joy is here, love is in the air.

Feel the breeze, everywhere.

Allow it to become your;

Once more! you just open the door,

This is only for you,

Now you have to do.

You supposed to do! O comes on.

It’s time to move on.

Tuesday, June 05, 2012

April-girl

April-girl

In the last April

I saw a girl

She took my heart at while.

She was in blue,

And red n brown curl.

The girl! Took my everything,

Then move so fast as Wing.

I fall in what I don’t know?

It makes me impatient, She Girl.

In the last April.

I almost lost that girl.

As time to go,

I moved in row.

That was the march,

When I was in park,

I saw again the April-girl.

With same suit and curl.

I don’t know what happens to me?

When I saw her?

I lost my mind,

I feel like wind.

Things not look like real,

Unable to say what I feel?

What happen to me?

What was this curse?

I need to answers.

Just I moved on way,

There lot of things to say.

I found her alone

Make the dare

Excuse me! Then told,

What I had to share.

She react a while n throw a smile.

She answered with an innocent Line,

I will be waiting for the same tactile,

Now, I have to make the ride.

She took her stuff, n band the curl,

Kissed me back and said

Do wait for me and keep heart open

I wish, I may get return.

All thing get moved, I still remain stand,

I have no words that what I feel,

Just she moves in my mind with lovely red n brown curl.

I think that I again lost my April-girl.

Saturday, June 02, 2012

Do you feel the same?


Sometime it feels me happy,

Sometime it made me sad,

I fall in you with craze,

Sometime it got too made.

It’s all about me,

What about to you?

Do you feel the same, what I do?

Sometime I got a smile,

Sometime I go in grave.

One day I feel to fly,

When you came to me with shy.

It’s about me, what I feel?

Do you feel the same, what I do?

Its gonna me,

I lose every fear,

All about to you,

When u coming O Dear.

Someday I like to lose everything.

Sometime I pretend to win.

It’s about to me.

What about to You?

Do you feel the same what I Do?

Sometime might be I stupid

Sometime may be I fool

Then you keep eyes in me

Put the hands together

To make my heart so cool,

And I don’t want to lose it ever.

Want to live with you forever.

It’s about my feel,

It is so real.

What about to you?

Do you feel the same what I Do?

Tuesday, May 22, 2012

नैना


नैना नैना
दो सुन्दर सुन्दर
प्यारे प्यारे नैना
जग दिखाये ,मन बहलाए ,
रंग बिरंगे ख्वाब सजाये ,

तेरे नैना , मेरे नैना
ये दो सुन्दर-सुन्दर नैना

स्वप्न दिखलाये ,लक्ष्य बंधाये ,
राह बताये , दृढ संकल्प बनाये ,
भाव जगाए , साथ निभाए ,
नजरो ही नजरो में कुछ कह जाए ,
ये दो नैना
रूप निखरे , रंग निखरे ,
कालिख पोते खुद पर
सज्जा फिर तेरी सवाँरे ,
प्रेम सिखाये ,दुःख सह जाए ,
रख पलकों में आब भाव के ,
स्नेह दिखाए , क्लेश बताये ,
छलका कल दो बूँद सुधा की ,
दर्द में भी तेरा साथ निभाए ,
ये दो काले काले से नयना

प्रेम स्वीकृति दे शरमा कर ,
क्रोध की भी अग्नि बरसाए
बात
करे नैना नयनो से तब ,
जब बातों को शब्द भी कम पड़ जाए
भावों का अथाह समन्दर ,
रखे सुख दुःख अपने अन्दर
ऐसे दो निश्छल नैना ,
बिधाता की हमको है भेट ये सुन्दर दो नैना “॥

Tuesday, May 15, 2012

अनजाना सफ़र अनजानी मंजिल

अनजाना सफ़र अनजानी मंजिल !


सपने संजोये मैंने पलकों में ,
एक सुनहरा सपना देखा ।।
हाथ लिए हाथों में उनका ,
मैंने यूँ
संग अपना देखा
देखा ख्वाब जब थे हम...
था मै ,वो थे और बस थी तन्हाई ,
समां वो शाम का ,
जब करीब वो मेरे मेरे आई ,
पास थे तो बस हम दो ,
दूर जा रही थी परछाई
उंच- नीच और अड़क सा रास्ता,
हाथ पकड़ कर उनका, चल रहा था हँसता हँसता

साथ ना जाने कब छुटा,
हाथ ना जाने कब छुटा ,
मोड़ भरी थी ऐसी रहें ,
ना जाने कब रूठ गया ,
आँखों से वो सपना झूठा
बन पानी बह गए सपनो के मोती
ख्वाब सुनहरा टूट गया,
कोई जब अपना छुट गया
एक किनारे खड़े रहा था मै ,
दूजे पर वो कूच गया
चला अकेला राह निभाने ,
राहों पर दिल मेरा टूट गया

समेट टुकड़े ,बना गान्ठ्ली ,
चुन अनजाना डगर फिर अनचाही मंजिल बनाई।

चलता राहों में तनहा हमेशा ,
संग संग ले तन्हाई ,
पहुँच गया फिर ऊँची चोटी को ,
जहा पहुँच पाने की ,किसी के ना मन में आई

दूर उठा कर नज़र जब देखा ,
जा रहे थे वो ,ले संग एक नया हमराही ,
मै तो पहुँच नहीं अब सकता ,
मंजिल उनसे कुछ यूँ दूर बनाई
उगता सूरज देख अब करू तमन्ना ,
मै ना सही ,जा छुले जाकर उनको मेरी परछाई

Saturday, May 12, 2012

मै !

कहने को तो बहुत कुछ है पर कुछ कहता नहीं बहुत कुछ कहे बिन सब कुछ बोल जाता हूँ और बहुत बोलते हुए भी कुछ नहीं कहता

जब दिल उदास रहता है तो बस किसी सच्चे दोस्त के पास होने का गम करता हूँ फिर दूजे ही पल होठो पर मुस्कान आती है और कलम सी सच्ची दोस्त मेरे हाथो में होती है दोस्त तो कहते है तेरे दिल में बहुत प्यार बसा है किसी की खातिर , पर मेरे खंडहर से दिल में जब वो झरोखे से देखते है तो वो ही दोस्त कहते है यहाँ तो सिर्फ दर्द है
अन्दर की महसूस करने की शक्ति मैंने खो दी है ,पर जाने क्यों पन्नो पर सिर्फ भावनाए ही बहती है खुद से ही सवाल करता हु और खुद ही जवाब खोजता हूँ बस इन्ही उलझनों में उलझा हुआ एक अनसुलझा अफ़साना हूँ मै

*भास्कर*