अनुभूति
कल्पना और हकीकत की सीमा से परे ...भावनाओ का प्रवाह !
Lovely world
Sunday, September 30, 2012
आज फिर क्यों वो मुझसे बोल उठी ?
Thursday, September 20, 2012
सोच
काहे को सोचे बन्धु तेरे जीवन में गम है है,
सोच तेरा हर गम ही कम है ।
देख उनको जो गमगीन है ख़ुसिओं में भी ,
क्या तेरी एक ख़ुशी उनकी खुशीओ से कम है ?
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