Lovely world

Saturday, May 12, 2012

मै !

कहने को तो बहुत कुछ है पर कुछ कहता नहीं बहुत कुछ कहे बिन सब कुछ बोल जाता हूँ और बहुत बोलते हुए भी कुछ नहीं कहता

जब दिल उदास रहता है तो बस किसी सच्चे दोस्त के पास होने का गम करता हूँ फिर दूजे ही पल होठो पर मुस्कान आती है और कलम सी सच्ची दोस्त मेरे हाथो में होती है दोस्त तो कहते है तेरे दिल में बहुत प्यार बसा है किसी की खातिर , पर मेरे खंडहर से दिल में जब वो झरोखे से देखते है तो वो ही दोस्त कहते है यहाँ तो सिर्फ दर्द है
अन्दर की महसूस करने की शक्ति मैंने खो दी है ,पर जाने क्यों पन्नो पर सिर्फ भावनाए ही बहती है खुद से ही सवाल करता हु और खुद ही जवाब खोजता हूँ बस इन्ही उलझनों में उलझा हुआ एक अनसुलझा अफ़साना हूँ मै

*भास्कर*

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