अनुभूति
कल्पना और हकीकत की सीमा से परे ...भावनाओ का प्रवाह !
Lovely world
Friday, February 28, 2014
अगर जिंदगी एक दीया है
,
तो मेरे दीये का तेल बडी तेजी से जल रहा है ।
मै इस दीये की उमर बढने के लिये
उसकी रोशनी कम नही कर सकता ।।
ये तो मै ही जानता हु सर
,
जिंदगी के आखरी मोड पर कितना अंधेरा है ॥
सफर (1970)
प्यासो की प्यास
समुंदर मे रहने वालो
,
माना सारी नदिया तेरे पास है
,
तालबो के ही मालिक ही सही माना
,
पर प्यासो की आस है ।
दौलत से ही मिलती अगर जन्नत
,
तो फिर भला कैसे वो कहते..
रब तो है साथ हमारे
और
इश्क़-ए- खुदाई भी हमारे पास है ॥
माना नूर है तेरे कदमो मे
,
तो कहकशा भी मेरे पास है
,
तु परी है जन्नत की तो खुश्बु मे हम भी पलाश है ।
ओ ! महलो के मालिक
,
छोटे ही आशिया वाले ही सही पर अपनो की आस है ॥
तालबो के ही मालिक सही माना
,
पर प्यासो की प्यास है ।
।
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