अभी लेटा था बस मैं,
सोचा तुम्हें मैसेज करता हूं,
पुराने दिन याद आ गए जिनमें
तुम से ढेर सारी बात करता हूं।
हां ! मैं तेरी परवाह करता हूं।।
तुमसे मिलने के लिए,
याद वो कॉलेज के बंक करता हूं।
फिर तुम्हारे साथ
याद वह लंच करता हूं।
सपना टूटने से डरता हूं,
पता नहीं ये सब क्यू करता हूं?
हां ! मैं तेरी परवाह करता हूं ।
रात भर जगता हूं
अक्सर टेरिस पर फिरता हूं
चांद को तकता हूं,
अपने चांद को मिस करता हूं।
हां ! मैं तेरी परवाह करता हूं।
तुमसे बात करने को बेताब रहता हूं।
मन मेरा भी नहीं करता खुद को रोकने का,
फिर भी खुद को रोका करता हूं,
लगता है खुद से ही धोखा करता हूं।
हां! मैं तेरी परवाह करता हूं।
अकेले ही हर स्पेशल डे सेलिब्रेट करता हूं।
तुम्हारी कमी महसूस करता हूं।
दोस्त कहते हैं इतना बोर क्यू करता हूं ,
सबसे खता होकर ,ऐसे ही इंजॉय करता हूं।
हां !मैं तेरी परवाह करता हूं।
चाहे मैं अजीब हरकतें करता हूं,
तुम्हें काफी परेशान करता हूं,
तुमसे मिलने के बहाने करता हूं,
समाज से डरता और नहीं भी डरता हूं।
हां! मैं तेरी परवाह करता हूं।
तुम्हारा नाम लेने से डरता हूं,
सबसे झूठ कहता हूं,
की मैं तुम्हें याद नहीं करता हूं।
लेकिन मैं तुम्हें बहुत मिस करता हूं।
मिस करता हूं, मिस करता हूं,
ऐसे ही कुछ लिखकर, मन हल्का करता हूं।
हां ! मैं तेरी परवाह करता हूं।
मैं तेरी परवाह करता हूं।
आभार एवं रचना : // आर. पूनिया //