Lovely world

Saturday, May 30, 2020

मैं तेरी परवाह करता हूं

अभी लेटा था बस  मैं,
सोचा तुम्हें मैसेज करता हूं,
पुराने दिन याद आ गए जिनमें
तुम से ढेर सारी बात करता हूं।
हां ! मैं तेरी परवाह करता हूं।।

तुमसे मिलने के लिए,
याद वो कॉलेज के बंक करता हूं।
फिर तुम्हारे साथ
याद वह लंच करता हूं।
सपना टूटने से डरता हूं,
पता नहीं ये सब क्यू करता हूं?
हां ! मैं तेरी परवाह करता हूं ।

रात भर जगता हूं
अक्सर टेरिस पर फिरता हूं ‌
चांद को तकता हूं,
अपने चांद को मिस करता हूं।
हां ! मैं तेरी परवाह करता हूं।

तुमसे बात करने को बेताब रहता हूं।
मन मेरा भी नहीं करता खुद को रोकने का,
फिर भी खुद को रोका करता हूं,
‌लगता है खुद से ही धोखा करता हूं।
हां! मैं तेरी परवाह करता हूं।

अकेले ही हर स्पेशल डे सेलिब्रेट करता हूं।
तुम्हारी कमी महसूस करता हूं।
दोस्त कहते हैं इतना बोर क्यू करता हूं ,
सबसे खता होकर ,ऐसे ही इंजॉय करता हूं।
हां !मैं तेरी परवाह करता हूं।

चाहे मैं अजीब हरकतें करता हूं,
तुम्हें काफी परेशान करता हूं,
तुमसे मिलने के बहाने करता हूं,
समाज से डरता और नहीं भी डरता हूं।
हां! मैं तेरी परवाह करता हूं।

तुम्हारा नाम लेने से डरता हूं,
सबसे झूठ कहता हूं,
की मैं तुम्हें याद नहीं करता हूं।
लेकिन मैं तुम्हें बहुत मिस करता हूं।
मिस करता हूं, मिस करता हूं, 
ऐसे ही कुछ लिखकर, मन हल्का करता हूं।
हां ! मैं तेरी परवाह करता हूं।
मैं तेरी परवाह करता हूं।

                      
आभार एवं रचना :  //   आर. पूनिया  //

Friday, May 29, 2020

गणितीय प्रेम पत्र

मेरा प्रेम है कुछ ऐसा
नवम वर्ष की रचना के वृत जैसा ।
सोच कर भी यह समझ ना आता
किधर से शुरुआत करू, जिधर तेरा वास्ता।

मेरा मापदंड शायद,  कुछ इस तरह है घट जाता
तेरे परिमाप समक्ष हमेशा छोटा ही पड़ जाता ।
मैं अपना व्यास चाहे जितना बढाता,
एक तू है,
जिसका क्षेत्रफल मुझमे कभी नहीं समाता ।

रचना विकट ऐसी हो तुम रेखा की,
ज्यमिति शायद ही परिभाषित कर पाता ।
मेरा मन भी ना जाने कैसे, सम्मोहित हो गया ,
तेरी कृति को मर्यादित करना चाहता ।

सहारा लाख लेकर, चर अचर राशियों का,
तेरे हर मौन प्रश्नो का मै उत्तर खंगालता ।
ना जाने किस प्रश्न की विकट श्रृंखला तुम,
समीकरण कभी सत्य को प्राप्त नहीं कर पाता।

हर कोशिश करता हूं, तुझ जैसा कभी मैं हो पाता,
पर 
क्षणिक तुझसे पीछे, अशांत दशमलव मुझ में लग जाता।।
हर विघ्नों को लांग कर, जब तेरे करीब सा आता,
दूरी मिलन की, ना जाने कैसे माप वर्ग कर जाता ।

मेरे मन प्राण में बस ,एक प्रेम-प्रमेय तुम्हारा,
अटल सत्य की भांति मनोरम बसता ।
हर क्षण ,हर पल, अपनी चर्या में,
उसी प्रमोद सिद्धांत की सत्यता को तरसता।

मैं हर राशि हर कथनों हर सिद्धांतों की
राह पकड़ कर,
उत्तर में प्रेम प्राप्त करने को मरता जाता हूं।
एक ना जाने क्यों तू है हठधर्मी,
हल में सदैव, मैं उत्तर अपरिमेय ही पाता हूं ।

नेह प्रश्न बस एक तुम ही से,
क्या मैं हल इसका तुमसे पाऊंगा?
तुम बात करती हो असमता की,
क्या मैं तुम्हें कभी,
अपने समक्ष सर्वांगसम पाऊंगा?

बहुपद सा है तेरा रूप विस्तृत
हर चर मान का मैं राही,
प्रतीक्षा में हूं ,उस गणन अंक के
जब दोनों हो पूरक, तेरा पथ मेरी राशि।
जन्म जन्मांतर के आलेखी,
एक दूजे के अभिलाषी, एक दूजे के अभिलाषी।

।।अंजनी भार्गव भास्कर।।

Monday, May 18, 2020

इस तरफ था मै

इस तरफ था मै खड़ा
तू खड़ा उस ओर था

मैं जहां था रूका
मंजर वहां का झकझोर था

उस तरफ थी वादियां हंसी 
यहां तो बस सैलाब का ही शोर था 

खुश था तू दूर जाकर मुझसे
पर उन आंसुओं की वजह कोई और था।

इस तरफ था मैं खड़ा
तू खड़ा उस ओर था।

तुम तो थे आलम फिजा में
खिंजा का आलम यहां झंझोर था।

सर्द वादियों में भी तपन थी सिसकीयों कि
बिखरा हुआ दिल, मातम से सराबोर था।

छूट रहा था उसका और मेरा साथ
बहार ने ना जाने लिया कैसा मोड़ था ।

इश्क पाने को निकले थे  रोशनी से
पर आफताब कुर्बानियों में ही मगरूर था।

इबादत थी जिसकी नसीहत सभी को
मैंखाने में पड़ा आज वो बेहसूर था ।

किस तरफ था मैं खड़ा?
तकदीर ने लिया कैसा मोड़ था !  

इस तरफ था मै खड़ा
क्यो  तू खड़ा उस ओर था!

                                         ।।भास्कर।।

Friday, May 01, 2020

मैं मजदूर तुम्हारा

मैं मजदूर तुम्हारा

मैं मजदूर तुम्हारा मैं भी एक इंसान हूं 
जीता नहीं इच्छा से अपनी
माया का रंक महान हूं
सोता हूं अपनों के ख्वाबों की खातिर
पल-पल मरता शाप समान हूं
हूं मैं भी इसी मही का कंकड़
रखता शक्ति का थोड़ा कम अभिमान हूं।

मैं मजदूर तुम्हारा मैं भी एक इंसान हूं।।

नहीं चाहता, चाह तुम्हारे जैसी
बस मांगता थोड़ा सा सम्मान हूं।
माना अपनी तुच्छ वर्ण श्रृंखला
पर कुटुंब का अकेला भरतार समान हूं।
बस दे दो अपना तनिक सहारा
दुर्भाग्य से लौ की बुझी कालिख बेकाम हूं।
दाता तुम ही म्हारे
मैं अकिंचन, तुम मेरे प्रधान हो
मैं मजदूर तुम्हारा मैं भी एक इंसान हूं।।