Lovely world

Wednesday, June 26, 2013

I donna want to be...

Don't say me the hi,
Not to be the byye,
Not just want to gain ,
I don't wanna see again 
Oh ! love !
I donna want to be hurted again.

up in the sky ,
My dreams was too high,
The fate not be the same,
Things changes like,
Never it goes again ,
Black n black,
Dark n dark ,in the vain 
Oh!dream
I donna want to be hurted again.

love ! is it existence?
what waits for me now ? how !
No ! not it again !!
stay far way
Good to be in the pain 
Don't waana take this again
stand away !
O ! soul 
I donna want to be hurted again.
 
Its word of the gain 
A lots love and pain
Its hard to feel
like the play never happen
the truth is dt 
Near or far
always kept the heart open
but
O ,Fate !
I donna want to be hurted again.






Sunday, June 23, 2013

दोहरा स्वांग

चाहत तो है बहुत , खुसी की
पर गम है जो , अब छोडे नहीं बनता |
मंजिल तो लिए  इस दिल में ,
पर तनहा भी तो नहीं ,
देखो ये रस्ता |
डरता हु उस मंजिल की खुसी से
जहा पहुँच कर
अपनो को न खो दु ,
कही उनके क़र्ज़ का कर्ज़दार न हो जाऊ !
 दर्द का , एकतार  न बन  जाऊ |
ना अब ना होगा ,
इस दोहरे स्वांग में जीना ,
डर डर कर , सब अपनो को खोना |
मंजिल दूर भले हो जाए ,
संग अपनो का  ना छोड़ पाऊ ,
क्या जानो वो व्यथा ,
जब लक्ष्य  ले  अकेला मर जाऊ |

नहीं नहीं | मंजिल तब तक ना हो ,
जब तक हो साथ अधुरा |
हाथ बढ़ा खड़ा रहा हु ,
नजरो से उनको ताक रहा हु  ,
देखे - देखे  कौन - कब  हाथ बढ़ाएगा ?
मेरे साथ अब कौन ,
किसने  साथ मंजिल तक का निभाना है ?
या फिर तनहा ही दे जोर  अंधेर डर को ,
कदम -कदम बढ़ाना है |||     
                                                                                                     || भास्कर ||

Friday, June 07, 2013

दो पल जीने की राहो से .....!!

 दो पल जीने की राह ने ,
क्या- क्या दिखलाया है !!
अपनो को अपनो की खातिर ,
हर तरह ...!
अपनो से गैर बनाया है !
कर .....!!
छोटे से अभिमान का ,
बड़े- बड़े औदो ने चुकाया है । 
डंके की चोट पर बजता ,
उसका  अटखेल उड़ाया है । 
दो पल जीने की राहो ने 
जाने  क्या - क्या दिखलाया है  !!!

प्रेम न बसता , द्वेष न बसता ,
द्रवित ह्रदय ना हो पाया ,
व्यर्थ ही !
जाने क्या खोता , क्या पता ,
पथिक ने हर भाव से खुद को गवाया है ।
 जीता मृत भावो में हर दम 
व्याकुलता का साया है !!!
शायद ! ये ही दो पल ...
जीने की राहो ने 
हर पल में , पल पल मरना दिखलाया है !!!!
                                                                                         ॥ भास्कर ॥