Lovely world

Saturday, March 08, 2014

विरहन



विरहन
जो अगर शब्दो के जाल बुन पाती ,
बातो की गाठे बांध कर,
हंसीन ख्वाबो की दुनिया मे,
जहा भावो कि तार के सरगम तले
सोचा जो कभी , ले जाने को तुम्हे ,
पा लेने का जाल बनाती ॥
जो अगर शब्दो के जाल बुन पाती......!!

जो नज़रो के तीर चला पाती,
तेरे मिची-मीची नज़रो के ढाल तोड्ने की खातिर ,
तिरछी नैनो के कटार चलाती।
प्रेम बाण चला कर
तेरे कठूह हृद्य को छ्ल जाती।
लहु हृद्य से जो बहा सके ,
वैसा अस्त्र बना पाती।
वर्षा कर देती फिर तुझ पर जो अगर नज़रो के तीर चला पाती॥

जिस बहाव मे तु बह सके ,
वो धार कहा से मै लाऊ ?
जो अगर मै बुंदे होती ,
तेरे तन- मन पे मै गिर जाती,
ना रिमझिम तो फिर ,
बहती बहती तुझमे मिल जाती।
जो मै ना अभी बंधी होती लज्जा से ,
तो तुझसे शायद मै वो सब कह पाती....
ना ताल , ना बर्षा , मै धारा सी बह आती ॥
प्रेम के समुंदर मे मै ,
फिर तुझसे घुल- मिल जाती ॥
काश ! तुमको मै ये समझा पाती !!!




Friday, February 28, 2014



अगर जिंदगी एक दीया है , तो मेरे दीये का तेल बडी तेजी से जल रहा है ।

मै इस दीये की उमर बढने के लिये 
उसकी रोशनी कम नही कर सकता ।।
ये तो मै ही जानता हु सर ,
  जिंदगी के आखरी मोड पर कितना अंधेरा है ॥  


सफर (1970) 

प्यासो की प्यास



समुंदर मे रहने वालो , माना सारी नदिया तेरे पास है ,
तालबो के ही मालिक ही सही माना, पर प्यासो की आस है ।
दौलत से ही मिलती अगर जन्नत, तो फिर भला कैसे वो कहते..
रब तो है साथ हमारे  और  इश्क़-ए- खुदाई भी हमारे पास है ॥
माना नूर है तेरे कदमो मे , तो कहकशा भी मेरे पास है ,
तु परी है जन्नत की तो खुश्बु मे हम भी पलाश है ।
ओ ! महलो के मालिक ,
छोटे ही आशिया वाले ही सही पर अपनो की आस है ॥
तालबो के ही मालिक सही माना, पर प्यासो की प्यास है ।