Lovely world

Wednesday, May 16, 2018

अपना शहर छोड आया हूँ ...



यही कुछ दूर पहले
अपना शहर छोड आया हुँ
अपनो को छोड आया हूँ ,
अपनापन छोड आया हुँ
अलग जो है अब , तब से ,
जहां मेरा जुडाव था ।
अपने ही हाथों ,
अपना लगाव तोड़ आया हुँ ।
यादो मे जो था मेरे बसा
यादो का वो बहाव मोड़ आया हूँ ।
यही कुछ दूर पहले
अपना शहर छोड आया हुँ


पक्का धागा ना सही ,
रिस्तो का  झिना झिना बुनाव छोड आया हुँ ।
भाग दौड़ मे दो रोटी की खातिर
आसमान कीं होड़  करते
उड़ते परों का ख्वाब छोड आया हुँ ।
मंगता हूँ जवाब
थोडा जवाब दे , ओ शहर ,
क्यूँ पहचान वाले इस शहर कि  खातिर
अपनी पहचान छोड आया हुँ ?
यही कुछ दूर पहले
अपना शहर छोड आया हुँ