आइना जो देखोगे ,
जीते जी मर जाओगे ,
पलके ना उठा रहे ,
सरम से झुकी बेशरम आँखे !
दुःख कैसे ले उसका ,
सीने पे ,जी पाओगे ?
हर पुकार में आह छुपी ,
हर दर्द में सिसकिया उसी की ,
हर मूक में आज एक ही भाव !
कतरा कतरा करे सवाल ,
कैसे जी पाओगे ?
दुःख देकर उसको !
ओ बेशरम !
अब तो हो जा शर्मसार ।
दिलो दिलो में आग लगी है ,
विप्लव करे आह्वान ,
दुःख क्या क्या बयाँ करे वो ,
लुट गई जो उसकी आन ।
जर्रा जर्रा डूबा गम में ,
कैसे जी पाओगे ?
मृत आत्मा और लिए देह बेजान !!
उठो बहनों ,उठो भाइयों ,
जला मशाल सम्मान की ,
ले सपथ , बेबश नही ,लाचार नहीं,
अंत करे उस अंधेर का ,
जहा नारी सिर्फ एक देह सामान !!
करे स्थापना नए दौर की ,
जहा एक एक की आबरू ,दूजे की जान !!!
!! भास्कर !!
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