Lovely world

Monday, February 11, 2013

एक उम्मीद ,एक भरोसा !

जब चलते चलते  राहों पर पदचिन्ह धुंधला जाऐगे  ,
तब राहो से कर दोस्ती  , 
मंजिल सामने लाएँगे ।
उम्मीद से जब नाता  लगे मुड़ने,
यादो में खो कर ,
सहारा ए उम्मीदी बंधाएंगे  ।।
आसू ना रुकने दे ,बह जाने दो अवसादों को ,
नजरो में
 तब ही तो नव-कमल खिल पाएँगे ।
थक हार कर, छुपती -छिपाती पलछिने ,
खिलखिलाते पास आ जाएंगी । 
पथिक !
राहो से दोस्ती कर  , 
मंजिल  सामने ले आएँगे  ।
 दूर हो जब सवेरा ,
दीखता न हो  ,बस हो घना अन्धेरा ,
एक दीप लिए आशा का ,
छोटा सा आशियाना तब जगमगाएंगे !
रोक सकेगा तो रोके रवि 
किरण स्वयं हम बरसाएँगे ।
 भूल पद-चिन्हों को, 
स्वार्णिम स्व-चिन्ह बनाएगे ।।
"भास्कर "