Lovely world

Sunday, February 26, 2012

बिषमता जिंदगानी की......


हर मोड़ पे देखी बदलती ये जिंदगानी है
हर राह पे एक नई कहानी है,
सभी कश्ती चाहती है मंजिल को ,
किसी की नदीया सुखी तो ,
किसी के बहाव में पानी है
हर मोड़ पे देखी बदलती ये जिंदगानी है

कोई खेले खेल माया का ,
कोई सरस्वती का दानी है ,
किसी को मांगे मिले ना दाना ,
किसीं की हर फरमाइश .... बेमानी है
हर मोड़ पे देखी बदलती ये जिंदगानी है

कही रंग- रूप से खिले है चहरे ...
कुरूप किसी की जवानी है ,
कही मधुशाल में नदिया बहती ,
कही ना पिने को पानी है
हर मोड़ पे देखी बदलती ये जिंदगानी है


डरे सहमे वो रहते घरों में ,
भिक्षुक यहाँ राह का ज्ञानी है ,
रहते बुद्धिजीवी चुप्पी साधे ,
हर तरफ पाप ने बनायीं राजधानी है
सत्य रहे ......अपनी लाज बचाए,
दुराचार बना अभिमानी है ,
आज की इस सुसुप्त दुनिया में
मृत पुरुसत्व की मनमानी है
हर मोड़ पे देखी बदलती ये जिंदगानी है
हर मोड़ पे देखी बदलती ये जिंदगानी है

Sunday, February 12, 2012

प्रार्थना

हे शुन्य शक्ति कौन हो तुम ........?
मन में बसा एक सवाल हो तुम .
चित्त जो खोजता , वो जवाब हो तुम...
क्या हो तुम ???
प्रश्नों की एक अलबेली सी कड़ी हो ...?
या फिर अवरक्त प्रकाश की लड़ी हो तुम ...
कौन हो तुम ? हर श्वास में बस तू ही है समाता !!!!!!


हो तुम दर्शक , या फिर दर्पण ....?
या फिर सुप्त ह्रिदयो का स्पंदन !!
क्या हो तुम ....? हो तुम एक अद्भुत शीतल सी सिहरन !!!
भावों का तार तार है तुझको अर्पण ..........!!

ना जाने कैसा तुझसे ये कैसा नाता .....
बिना ध्याये तुमको , रहा ना जाता
प्रेम विवश ये भाव जगे
एक रूप , एक मन ,एक जीवन
कर दू सब तुझको समर्पण .....!!!!



एक अलौकिक तू , तू ही श्रीष्टी का सृजन !!
तुम बिन रहा ना जाता
रोम रोम में बसे हो तुम ,
श्रधा की एक ज्योत अल्लोकिक , ध्यान धरे तू मन में जगाता !!!!
हे ईश्वर !!! तुझसे ही तो मेरा जनम जनम का नाता !!!

Wednesday, February 08, 2012

ख्याल

हर वक़्त एक यही ख्याल आता है ....
क्यों होता नहीं जो ये पागल दिल चाहता है !

जीना नहीं उनसे बिछर कर , मरने को जी चाहता है.,...
मय्यत पे वो कही आ एगेंगे शायद मेरी ,ये सोच के सो जाने को जी चाहता है!!!!!

Tuesday, February 07, 2012

Thought

सबसे आगे वो ही चलता है , जो अकेला चलना जनता है ! !

Thought

Be true and Transparent with yourself... All will love U !!!

जब उन् लम्हों को याद करता हूँ

हर रिश्ता मिला है विरासत में ,
फिर भी दोस्ती क्यों अलग से बनाई है?

क्यूंकि हर रिश्ते बनाए थे खुदा ने,
और दोस्ती खुद खुदा बनकर आई है।।

मै बहार खड़ा बारिश की बूंदों में उन् लम्हों को याद करता हूँ ..
पानी की टपकती बूंदों के बीच,
उन्ही यादों के बीच फिर से खो जाना चाहता हूँ ॥

कभी हँसते थे साथसाथ, कभी लड़ा करते थे॥
आज उन्ही दोस्तों के साथ एक पल बिताने को तरस रहा हूँ ..

एक प्यारी सी मुस्कराहट होंठो पे आती है
और ये आँखे नम कर जाती है ..
जब उन् लम्हों को समेटने की कोशिश करता हूँ..


शायद हम लक्ष्य को पाने में इतना खो गए है की
खुद को बड़ा समझ,
दोस्तों का हाल तक पूछना भूल गए है..
जो दोस्ती कहते थे है पक्की,
आज उसे बोझ समझ कर सिर्फ घसीट रहे है..

काश हम वैसे ही रहते ,
वैसे ही हँसते,वैसे ही हर छोटी-छोटी बातों पे लड़ा करते ॥
आज इस बात का सिर्फ अफसोश कर रहा हूँ .......

इस बारिश में खुद को कम,आँखों को ज्यादा भिंगो रहा हूँ ........

जब उन् लम्हों को याद करता हूँ .....
नारी
त करो अपमान उसका ,
जिसके दम पर है दुनिया सारी .
बन कर दुर्गा अन्त किया पाप का ,
जिसके आगे शून्य शक्ति भी है हारी ।
सम्मान करो उस शक्ति का ,
जिस शक्ति का नाम है नारी ।


है ये निर्मलता की मूरत ,
जग में है ये सबसे नयारी .
देती सबको है ये जीवन ,
इसकी ही है ये दुनिया सारी ।
मत करो तिरस्कार उस शक्ति का ,
जिस शक्ति का नाम है नारी ।

नहीं किसी से कम है ये ,
हर पल है हम इसके आभारी .
हाथ पकड़ कर इसके ही ,
हमने देखी है ये दुनिया सारी ।
कभी बहन तो कभी पत्नी बनी ,
तो कभी ममता है इसकी सबसे प्यारी .
सम्मान करो उस शक्ति का ,
जिस शक्ति का नाम है नारी ।


ना है अबला ना बेचारी ,
इसके आगे है दुनिया हारी ।
कदम कदम पे है सह -भागी ,
कभी सीता तो कभी मनु रूप में इस्सने अपनी छवि उतारी ।
कोमल है , कमज़ोर नहीं ये ,
शक्ति का दूजा नाम है नारी ।।
शक्ति का दूजा नाम है नारी ।।



अनजानी - तम्मना

अनजानी - तम्मना



हाल क्या है मेरा तुझे बताऊ कैसे ?

जाना चाहे तेरे पास तो जाऊ कैसे ?

अब बातो का कोई बहाना नहीं मिलता ….

कैसे है हालत , दिल को दिल को समझाऊ कैसे ???



जिंदगी की डगर कही छोटी ना पड़ जाए

तेरे इंतज़ार में ….

सांसों की डोर कही टूट ना जाए

सपनो के मोती कही बिखर ना जाए …

समय की रेत फिसलती ही जा रही है ,

आशा की किरण ढलती जा रही है …

तेरे इंतज़ार में …………। ।।

तेरे बिन है बीत गए हर प्रीत के मौसम ,

बीत गए बारहों (12) मास ….

बीत गए सावन भादो ,

कही टूट ना जाए तुमसे मिलन की आश ..


अब ये दिल बस तड़पता है तेरे इंतजार में ।

रहता है बस तेरे दीदार की इंतजार में …

कैसे समझाऊ इस दिल को ,,,

कैसे बताऊ इसको की तन्हाइया ही है तेरी हमसफ़र .

साथ छोर जाए ,चाहे परछाई तेरी ॥,

ये ही रहेंगी तेरी अब रहगुजर …


इसी दिलासे के साथ ये नइया बहे जा रही है

न तो है मांझी इसका न है पतवार ...

अब तो ना जाने इसे किस भवर का इंतजार …………….

जब तुम आओगी ॥,

सायद तब हो सकता है कोई चमत्कार ॥

या तो होगा इकरार या फिर से तकरार


इसी इन्तजार में रहा है ये जीवन गुजर

पता नहीं वो पल भी आएगा ये ,

गुजर जाएगी जिन्दगी की डगर ….

इंतजार प्रिय का ....

बैठे उनकी राहों में ...
यूँ देखे ख्वाब सुनहरे !
आओगे कब तुम प्रियतम ...
नैन ठहर गए तेरी राह बटेरे !!!
इंतजार प्रिय का ....

What is this? What is this?


What is this? What is this?



Every day you come in my dream,

Every time I feel you.

Everyone says you not here,

But, I experience you everywhere.

What is this? What is this?

I am trying you to find,

But, I always you got in my mind.

Due to you, every time I bear

When you come to me, I become empty and nothing to share.

What is this? What is this?


A sweet loneliness pinches me

When, I think of you.

But, a smile comes and forgets everything

Because there is something,
Which bounded me to you?

What is this? What is this?



I always try to find

What, which is in Hide?

I almost find that...

Oh ….what is it?

It’s like a rail.

One side me another u

We always tougher, but in parallel...

What is this? What is this?


OR . May it like a river ?

Always come tougher, banks!

But not meet ever.

Aim of both is to find same

they meet on end, when nothing left to happen..

What is this? What is this?


OR, Is this love?

Is a bond forever? Is it….

Then why it hurts?

What is this? Nothing just an image

Which, i construct.

What is this? What is this?

What is this? What is this?