Lovely world

Thursday, October 17, 2013

लौटा हु आज



तनहा लौटा हु आज ,
अपनी वफ़ा पर खरा उतर कर । 
दे दिया उसे वो 
जो कभी ,
नहीं नहीं ,
अभी - अभी अपना हुआ था।  
अपना था वो ,
जो कब से पलकों का सपना था  . 
जब आई  लबो पे ,
तो वो बस - बेबस सा कर गई । 
फिर , 
मायूस लौटा हु  मै ,
अपने वादों पे खरा उतर कर ॥ 
ख्यालो  के सदके ,
ख्वाबो में बस एक ,
हंसी की ही तम्मना थी ,
पर ,
अश्को  की  थैली भर कर
तनहा लौटा हु आज ,
अपने आप में खरा उतर कर ॥ 
                                                                                                  ॥ भास्कर ॥

 

Wednesday, June 26, 2013

I donna want to be...

Don't say me the hi,
Not to be the byye,
Not just want to gain ,
I don't wanna see again 
Oh ! love !
I donna want to be hurted again.

up in the sky ,
My dreams was too high,
The fate not be the same,
Things changes like,
Never it goes again ,
Black n black,
Dark n dark ,in the vain 
Oh!dream
I donna want to be hurted again.

love ! is it existence?
what waits for me now ? how !
No ! not it again !!
stay far way
Good to be in the pain 
Don't waana take this again
stand away !
O ! soul 
I donna want to be hurted again.
 
Its word of the gain 
A lots love and pain
Its hard to feel
like the play never happen
the truth is dt 
Near or far
always kept the heart open
but
O ,Fate !
I donna want to be hurted again.






Sunday, June 23, 2013

दोहरा स्वांग

चाहत तो है बहुत , खुसी की
पर गम है जो , अब छोडे नहीं बनता |
मंजिल तो लिए  इस दिल में ,
पर तनहा भी तो नहीं ,
देखो ये रस्ता |
डरता हु उस मंजिल की खुसी से
जहा पहुँच कर
अपनो को न खो दु ,
कही उनके क़र्ज़ का कर्ज़दार न हो जाऊ !
 दर्द का , एकतार  न बन  जाऊ |
ना अब ना होगा ,
इस दोहरे स्वांग में जीना ,
डर डर कर , सब अपनो को खोना |
मंजिल दूर भले हो जाए ,
संग अपनो का  ना छोड़ पाऊ ,
क्या जानो वो व्यथा ,
जब लक्ष्य  ले  अकेला मर जाऊ |

नहीं नहीं | मंजिल तब तक ना हो ,
जब तक हो साथ अधुरा |
हाथ बढ़ा खड़ा रहा हु ,
नजरो से उनको ताक रहा हु  ,
देखे - देखे  कौन - कब  हाथ बढ़ाएगा ?
मेरे साथ अब कौन ,
किसने  साथ मंजिल तक का निभाना है ?
या फिर तनहा ही दे जोर  अंधेर डर को ,
कदम -कदम बढ़ाना है |||     
                                                                                                     || भास्कर ||

Friday, June 07, 2013

दो पल जीने की राहो से .....!!

 दो पल जीने की राह ने ,
क्या- क्या दिखलाया है !!
अपनो को अपनो की खातिर ,
हर तरह ...!
अपनो से गैर बनाया है !
कर .....!!
छोटे से अभिमान का ,
बड़े- बड़े औदो ने चुकाया है । 
डंके की चोट पर बजता ,
उसका  अटखेल उड़ाया है । 
दो पल जीने की राहो ने 
जाने  क्या - क्या दिखलाया है  !!!

प्रेम न बसता , द्वेष न बसता ,
द्रवित ह्रदय ना हो पाया ,
व्यर्थ ही !
जाने क्या खोता , क्या पता ,
पथिक ने हर भाव से खुद को गवाया है ।
 जीता मृत भावो में हर दम 
व्याकुलता का साया है !!!
शायद ! ये ही दो पल ...
जीने की राहो ने 
हर पल में , पल पल मरना दिखलाया है !!!!
                                                                                         ॥ भास्कर ॥


Friday, April 19, 2013

पलछिने १ ..

पलछिने १ 
वो यादो के नजराने ,
तेरी छुपी  अमानत की गठरी 
आज तह-ए -दिल से 
खोल रहा हूँ ॥ 

हर छोटी बातो की बहस ,
तेरा बस मुझसे हां -हां मिलाना ,
और बाद में कहना ,
क्यों झूटी बाते खानघोल रहा है?
शाम को बे-बात ही ,
घंटे भर ,
बनती बिल्डिंग के
उस मासूम से पेड़ की निचे बैठना ,

रातो को बस देर तक ,
कभी खुले आसमा के निचे,
तो कभी बालकोनी से ,
फ़ोन पर बाते करना !!
वो यादो की फुलझड़िया ...................!
 
सुबह फिर से बेचैनी ,
एक दूजे का इंतज़ार करना ,
और आते ही  
तेरे 
मेरा बस तुझमे खो जाना !!!!

बस इन यादो में , कुछ पल तेरे 
कुछ मेरे ,
कुछ पल हमारी ,
यादो के समेट रहा हूँ !!!!
                                                                                                     ॥ भास्कर ॥ 

Sunday, April 14, 2013

एक दुआ !

दामन में काटे ही मिले,
दुआ है !
तेरा  चमन  फूलो से 
सजता  रहे । 
गुलिस्ता महके नव - कलियों ,
नव- रंग , नयी -सुगंध से ,
खातिर तेरे ,
हर मकरंद से ,
अब  बैर खाया है । 
देख होठो पर तेरे  , 
लहर मुस्कान की ,
मेरा हर गम ,
मेरी  हर चिंता ,
हर मेरा दर्द , 
तेरी उस मंद ,चंचल  हंसी ने 
भुलाया है । 
अब ना जाने देना होठो से ,
इन तबस्सुम  की 
लडियो को ,
मेरे  बेचैन से ,
इस चैन का,
चैन  !
तेरी  इन्ही मुस्कानों में समाया  है !!

                                                                      ॥ भास्कर ॥ 
  
 


Friday, March 22, 2013

कदर नहीं उनको हमारी ,
जिनपर हम ज़ा फेकते है ।
क्या जानेंगे कीमत एहसास की ,
वो तो  चाहत  के लिए मोहब्बत को बेचते है ॥
हमें तो  गवारा नहीं रहना उनके बिना ,
फिर भी एक नज़र ना वो देखते है .॥
कहते है दूर-दूर तक नहीं उन्हें प्यार से  कोई वास्ता ,
फिर भी न जाने , छुप -छुप के क्यों पलकों को सेकते है !!!!!!


                                                                                                 !!भास्कर !!

Monday, February 11, 2013

एक उम्मीद ,एक भरोसा !

जब चलते चलते  राहों पर पदचिन्ह धुंधला जाऐगे  ,
तब राहो से कर दोस्ती  , 
मंजिल सामने लाएँगे ।
उम्मीद से जब नाता  लगे मुड़ने,
यादो में खो कर ,
सहारा ए उम्मीदी बंधाएंगे  ।।
आसू ना रुकने दे ,बह जाने दो अवसादों को ,
नजरो में
 तब ही तो नव-कमल खिल पाएँगे ।
थक हार कर, छुपती -छिपाती पलछिने ,
खिलखिलाते पास आ जाएंगी । 
पथिक !
राहो से दोस्ती कर  , 
मंजिल  सामने ले आएँगे  ।
 दूर हो जब सवेरा ,
दीखता न हो  ,बस हो घना अन्धेरा ,
एक दीप लिए आशा का ,
छोटा सा आशियाना तब जगमगाएंगे !
रोक सकेगा तो रोके रवि 
किरण स्वयं हम बरसाएँगे ।
 भूल पद-चिन्हों को, 
स्वार्णिम स्व-चिन्ह बनाएगे ।।
"भास्कर "