अब जिन्दगी को जीने का ख्याल आता है !
अब जिन्दगी को जीने का ख्याल आता है !
पल भर में हर गम गुम जाता है ,
हर सुख से वो खुसहाल जाता है ।
देखता नहीं किसी उंच -गहराई को ,
थोड़ी सी धुप में ,ठण्ड की चुभन भूल जाता है ।
देखते ही मन में बन जाता है दीपक ,
फैलता तो है किरन ,
खुद की परछाई को क्यों भूल जाता है ?
आज जिन्दगी को ऐसे ही जीने का ख्याल आता है ।
चाहता तो उस मुकाम मुकाम को है ,
जीसे ना नजरो से छु पाता है ।
इच्छाए तो बहुत सी दबी है दिल में ,
खाव्बो की पोटरी ना खोल पाता है ।
पल पल पल हर पल हर पल
हर पल नए पल का ख्याल अब खा जाता है ।
क्या कहे अब ऐसे ही जिन्दगी को जीने का ख्याल आता है ।।
अब जिन्दगी को जीने का ख्याल आता है !
पल भर में हर गम गुम जाता है ,
हर सुख से वो खुसहाल जाता है ।
देखता नहीं किसी उंच -गहराई को ,
थोड़ी सी धुप में ,ठण्ड की चुभन भूल जाता है ।
देखते ही मन में बन जाता है दीपक ,
फैलता तो है किरन ,
खुद की परछाई को क्यों भूल जाता है ?
आज जिन्दगी को ऐसे ही जीने का ख्याल आता है ।
चाहता तो उस मुकाम मुकाम को है ,
जीसे ना नजरो से छु पाता है ।
इच्छाए तो बहुत सी दबी है दिल में ,
खाव्बो की पोटरी ना खोल पाता है ।
पल पल पल हर पल हर पल
हर पल नए पल का ख्याल अब खा जाता है ।
क्या कहे अब ऐसे ही जिन्दगी को जीने का ख्याल आता है ।।
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