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Sunday, October 21, 2012

जिन्दगी को जीने का ख्याल आता है !

अब जिन्दगी को जीने का ख्याल आता है !
अब जिन्दगी को जीने का ख्याल आता है !
पल भर में हर गम गुम जाता है ,
हर सुख से वो  खुसहाल  जाता है ।
देखता  नहीं किसी उंच -गहराई को ,
थोड़ी सी धुप में ,ठण्ड की चुभन भूल जाता है ।
देखते ही मन में बन जाता है  दीपक ,
फैलता तो है किरन ,
खुद की परछाई  को क्यों भूल जाता है ?
आज जिन्दगी को ऐसे ही  जीने का  ख्याल आता है ।
चाहता तो  उस मुकाम मुकाम को है ,
जीसे ना नजरो से छु पाता  है ।
इच्छाए तो बहुत सी दबी है दिल में ,
खाव्बो की पोटरी  ना खोल पाता है ।
पल पल पल हर पल हर पल
हर पल नए पल का ख्याल अब खा जाता है ।
क्या कहे अब  ऐसे ही जिन्दगी को जीने का  ख्याल आता है ।।

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