अनुभूति
कल्पना और हकीकत की सीमा से परे ...भावनाओ का प्रवाह !
Lovely world
Monday, June 25, 2012
वो
लुट
कर
मेरी
नींद
और
सुकून
चलती
बनी
वो
,
और
पुछा
तो
उससे
तो
कहा
मै
तो
हमेशा
से
बाहें
फैलाये
तेरे
पीछे
खड़ी
थी
,
तुमने
मुड
कर
देखा
ही
नहीं
।
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