पनघट पर पनीया भरे गुजरी ,
मोहन ले गुलाल गुलेल बाट टोहे ।
ले मटकी चले ,राधा चाल मतवारी ,
मार कंकड़ मटकी ,तोड़े श्याम बनवारी ।
सर पकडे ,अरज़े राधा,
छोड़ ! काहे छेड़े मोहे बीच राहे ।।
बरबस काहे तंग करे , काहे मोको सताए ,
लाज लीन्ही मोरी ,लाज लीन्ही मोरी ,
काहे मालती बदरंग बनाए ।
कैसो ढीठ लाज़ बिना को , देख मेरे पिछु -पिछु आए ।
अरज करू ओ! सावरे, काहे मोको बिन मतलब सताए ?
कासे कहु मै ,मोको गिरिधर कितना सताए?
पकड़त कलईया बरबस ,चुडिया सब झड जावे ।
मतवारो खींचत चुनर , बेसरमी तोहे लाज न आए !
हार गई पईया पडू तोहे , बिच कड़ी लाज मोरी,
छोड़ ! काहे छेड़े मोहे बीच राहे ।।
मधुर -मधुर बंसी बाजे ,
यमुना तीरे अकेले बुलावे ।
डर लागे , फिर भी लाज त्यागे ,
कैसो कीन्हो जादू ,राधा छिपत -छिपत आवे ।
पडत पईया ,आँखे मूंदे छलकत जावे ,
कर जोड़े , अरज करे ,
काहे खेल खेले लाज से मोरी ,
छोड़ ! काहे छेड़े मोहे बीच राहे ।
काहे मोको इतना सतावे !!
।।भास्कर ।।
मोहन ले गुलाल गुलेल बाट टोहे ।
ले मटकी चले ,राधा चाल मतवारी ,
मार कंकड़ मटकी ,तोड़े श्याम बनवारी ।
सर पकडे ,अरज़े राधा,
छोड़ ! काहे छेड़े मोहे बीच राहे ।।
बरबस काहे तंग करे , काहे मोको सताए ,
लाज लीन्ही मोरी ,लाज लीन्ही मोरी ,
काहे मालती बदरंग बनाए ।
कैसो ढीठ लाज़ बिना को , देख मेरे पिछु -पिछु आए ।
अरज करू ओ! सावरे, काहे मोको बिन मतलब सताए ?
कासे कहु मै ,मोको गिरिधर कितना सताए?
पकड़त कलईया बरबस ,चुडिया सब झड जावे ।
मतवारो खींचत चुनर , बेसरमी तोहे लाज न आए !
हार गई पईया पडू तोहे , बिच कड़ी लाज मोरी,
छोड़ ! काहे छेड़े मोहे बीच राहे ।।
मधुर -मधुर बंसी बाजे ,
यमुना तीरे अकेले बुलावे ।
डर लागे , फिर भी लाज त्यागे ,
कैसो कीन्हो जादू ,राधा छिपत -छिपत आवे ।
पडत पईया ,आँखे मूंदे छलकत जावे ,
कर जोड़े , अरज करे ,
काहे खेल खेले लाज से मोरी ,
छोड़ ! काहे छेड़े मोहे बीच राहे ।
काहे मोको इतना सतावे !!
।।भास्कर ।।
No comments:
Post a Comment