Lovely world

Thursday, October 17, 2013

लौटा हु आज



तनहा लौटा हु आज ,
अपनी वफ़ा पर खरा उतर कर । 
दे दिया उसे वो 
जो कभी ,
नहीं नहीं ,
अभी - अभी अपना हुआ था।  
अपना था वो ,
जो कब से पलकों का सपना था  . 
जब आई  लबो पे ,
तो वो बस - बेबस सा कर गई । 
फिर , 
मायूस लौटा हु  मै ,
अपने वादों पे खरा उतर कर ॥ 
ख्यालो  के सदके ,
ख्वाबो में बस एक ,
हंसी की ही तम्मना थी ,
पर ,
अश्को  की  थैली भर कर
तनहा लौटा हु आज ,
अपने आप में खरा उतर कर ॥ 
                                                                                                  ॥ भास्कर ॥