Lovely world

Friday, April 19, 2013

पलछिने १ ..

पलछिने १ 
वो यादो के नजराने ,
तेरी छुपी  अमानत की गठरी 
आज तह-ए -दिल से 
खोल रहा हूँ ॥ 

हर छोटी बातो की बहस ,
तेरा बस मुझसे हां -हां मिलाना ,
और बाद में कहना ,
क्यों झूटी बाते खानघोल रहा है?
शाम को बे-बात ही ,
घंटे भर ,
बनती बिल्डिंग के
उस मासूम से पेड़ की निचे बैठना ,

रातो को बस देर तक ,
कभी खुले आसमा के निचे,
तो कभी बालकोनी से ,
फ़ोन पर बाते करना !!
वो यादो की फुलझड़िया ...................!
 
सुबह फिर से बेचैनी ,
एक दूजे का इंतज़ार करना ,
और आते ही  
तेरे 
मेरा बस तुझमे खो जाना !!!!

बस इन यादो में , कुछ पल तेरे 
कुछ मेरे ,
कुछ पल हमारी ,
यादो के समेट रहा हूँ !!!!
                                                                                                     ॥ भास्कर ॥ 

Sunday, April 14, 2013

एक दुआ !

दामन में काटे ही मिले,
दुआ है !
तेरा  चमन  फूलो से 
सजता  रहे । 
गुलिस्ता महके नव - कलियों ,
नव- रंग , नयी -सुगंध से ,
खातिर तेरे ,
हर मकरंद से ,
अब  बैर खाया है । 
देख होठो पर तेरे  , 
लहर मुस्कान की ,
मेरा हर गम ,
मेरी  हर चिंता ,
हर मेरा दर्द , 
तेरी उस मंद ,चंचल  हंसी ने 
भुलाया है । 
अब ना जाने देना होठो से ,
इन तबस्सुम  की 
लडियो को ,
मेरे  बेचैन से ,
इस चैन का,
चैन  !
तेरी  इन्ही मुस्कानों में समाया  है !!

                                                                      ॥ भास्कर ॥