पलछिने १
वो यादो के नजराने ,
तेरी छुपी अमानत की गठरी
आज तह-ए -दिल से
खोल रहा हूँ ॥
हर छोटी बातो की बहस ,
तेरा बस मुझसे हां -हां मिलाना ,
और बाद में कहना ,
क्यों झूटी बाते खानघोल रहा है?
शाम को बे-बात ही ,
घंटे भर ,
बनती बिल्डिंग के
उस मासूम से पेड़ की निचे बैठना ,
रातो को बस देर तक ,
कभी खुले आसमा के निचे,
तो कभी बालकोनी से ,
फ़ोन पर बाते करना !!
वो यादो की फुलझड़िया ...................!
सुबह फिर से बेचैनी ,
एक दूजे का इंतज़ार करना ,
और आते ही
तेरे
मेरा बस तुझमे खो जाना !!!!
बस इन यादो में , कुछ पल तेरे
कुछ मेरे ,
कुछ पल हमारी ,
यादो के समेट रहा हूँ !!!!
॥ भास्कर ॥
वो यादो के नजराने ,
तेरी छुपी अमानत की गठरी
आज तह-ए -दिल से
खोल रहा हूँ ॥
हर छोटी बातो की बहस ,
तेरा बस मुझसे हां -हां मिलाना ,
और बाद में कहना ,
क्यों झूटी बाते खानघोल रहा है?
शाम को बे-बात ही ,
घंटे भर ,
बनती बिल्डिंग के
उस मासूम से पेड़ की निचे बैठना ,
रातो को बस देर तक ,
कभी खुले आसमा के निचे,
तो कभी बालकोनी से ,
फ़ोन पर बाते करना !!
वो यादो की फुलझड़िया ...................!
सुबह फिर से बेचैनी ,
एक दूजे का इंतज़ार करना ,
और आते ही
तेरे
मेरा बस तुझमे खो जाना !!!!
बस इन यादो में , कुछ पल तेरे
कुछ मेरे ,
कुछ पल हमारी ,
यादो के समेट रहा हूँ !!!!
॥ भास्कर ॥