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Sunday, February 26, 2012

बिषमता जिंदगानी की......


हर मोड़ पे देखी बदलती ये जिंदगानी है
हर राह पे एक नई कहानी है,
सभी कश्ती चाहती है मंजिल को ,
किसी की नदीया सुखी तो ,
किसी के बहाव में पानी है
हर मोड़ पे देखी बदलती ये जिंदगानी है

कोई खेले खेल माया का ,
कोई सरस्वती का दानी है ,
किसी को मांगे मिले ना दाना ,
किसीं की हर फरमाइश .... बेमानी है
हर मोड़ पे देखी बदलती ये जिंदगानी है

कही रंग- रूप से खिले है चहरे ...
कुरूप किसी की जवानी है ,
कही मधुशाल में नदिया बहती ,
कही ना पिने को पानी है
हर मोड़ पे देखी बदलती ये जिंदगानी है


डरे सहमे वो रहते घरों में ,
भिक्षुक यहाँ राह का ज्ञानी है ,
रहते बुद्धिजीवी चुप्पी साधे ,
हर तरफ पाप ने बनायीं राजधानी है
सत्य रहे ......अपनी लाज बचाए,
दुराचार बना अभिमानी है ,
आज की इस सुसुप्त दुनिया में
मृत पुरुसत्व की मनमानी है
हर मोड़ पे देखी बदलती ये जिंदगानी है
हर मोड़ पे देखी बदलती ये जिंदगानी है

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