नारी
मत करो अपमान उसका ,
जिसके दम पर है दुनिया सारी .
बन कर दुर्गा अन्त किया पाप का ,
जिसके आगे शून्य शक्ति भी है हारी ।
सम्मान करो उस शक्ति का ,
जिस शक्ति का नाम है नारी ।
है ये निर्मलता की मूरत ,
जग में है ये सबसे नयारी .
देती सबको है ये जीवन ,
इसकी ही है ये दुनिया सारी ।
मत करो तिरस्कार उस शक्ति का ,
जिस शक्ति का नाम है नारी ।
नहीं किसी से कम है ये ,
हर पल है हम इसके आभारी .
हाथ पकड़ कर इसके ही ,
हमने देखी है ये दुनिया सारी ।
कभी बहन तो कभी पत्नी बनी ,
तो कभी ममता है इसकी सबसे प्यारी .
सम्मान करो उस शक्ति का ,
जिस शक्ति का नाम है नारी ।
ना है अबला ना बेचारी ,
इसके आगे है दुनिया हारी ।
कदम कदम पे है सह -भागी ,
कभी सीता तो कभी मनु रूप में इस्सने अपनी छवि उतारी ।
कोमल है , कमज़ोर नहीं ये ,
शक्ति का दूजा नाम है नारी ।।
शक्ति का दूजा नाम है नारी ।।
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