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Tuesday, February 07, 2012

अनजानी - तम्मना

अनजानी - तम्मना



हाल क्या है मेरा तुझे बताऊ कैसे ?

जाना चाहे तेरे पास तो जाऊ कैसे ?

अब बातो का कोई बहाना नहीं मिलता ….

कैसे है हालत , दिल को दिल को समझाऊ कैसे ???



जिंदगी की डगर कही छोटी ना पड़ जाए

तेरे इंतज़ार में ….

सांसों की डोर कही टूट ना जाए

सपनो के मोती कही बिखर ना जाए …

समय की रेत फिसलती ही जा रही है ,

आशा की किरण ढलती जा रही है …

तेरे इंतज़ार में …………। ।।

तेरे बिन है बीत गए हर प्रीत के मौसम ,

बीत गए बारहों (12) मास ….

बीत गए सावन भादो ,

कही टूट ना जाए तुमसे मिलन की आश ..


अब ये दिल बस तड़पता है तेरे इंतजार में ।

रहता है बस तेरे दीदार की इंतजार में …

कैसे समझाऊ इस दिल को ,,,

कैसे बताऊ इसको की तन्हाइया ही है तेरी हमसफ़र .

साथ छोर जाए ,चाहे परछाई तेरी ॥,

ये ही रहेंगी तेरी अब रहगुजर …


इसी दिलासे के साथ ये नइया बहे जा रही है

न तो है मांझी इसका न है पतवार ...

अब तो ना जाने इसे किस भवर का इंतजार …………….

जब तुम आओगी ॥,

सायद तब हो सकता है कोई चमत्कार ॥

या तो होगा इकरार या फिर से तकरार


इसी इन्तजार में रहा है ये जीवन गुजर

पता नहीं वो पल भी आएगा ये ,

गुजर जाएगी जिन्दगी की डगर ….

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