Lovely world

Tuesday, February 07, 2012

जब उन् लम्हों को याद करता हूँ

हर रिश्ता मिला है विरासत में ,
फिर भी दोस्ती क्यों अलग से बनाई है?

क्यूंकि हर रिश्ते बनाए थे खुदा ने,
और दोस्ती खुद खुदा बनकर आई है।।

मै बहार खड़ा बारिश की बूंदों में उन् लम्हों को याद करता हूँ ..
पानी की टपकती बूंदों के बीच,
उन्ही यादों के बीच फिर से खो जाना चाहता हूँ ॥

कभी हँसते थे साथसाथ, कभी लड़ा करते थे॥
आज उन्ही दोस्तों के साथ एक पल बिताने को तरस रहा हूँ ..

एक प्यारी सी मुस्कराहट होंठो पे आती है
और ये आँखे नम कर जाती है ..
जब उन् लम्हों को समेटने की कोशिश करता हूँ..


शायद हम लक्ष्य को पाने में इतना खो गए है की
खुद को बड़ा समझ,
दोस्तों का हाल तक पूछना भूल गए है..
जो दोस्ती कहते थे है पक्की,
आज उसे बोझ समझ कर सिर्फ घसीट रहे है..

काश हम वैसे ही रहते ,
वैसे ही हँसते,वैसे ही हर छोटी-छोटी बातों पे लड़ा करते ॥
आज इस बात का सिर्फ अफसोश कर रहा हूँ .......

इस बारिश में खुद को कम,आँखों को ज्यादा भिंगो रहा हूँ ........

जब उन् लम्हों को याद करता हूँ .....

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