मेरे अश्क , मेरी कहानी
आखो में मेरे ,
बस अश्क ही बसते ,
ये ही मेरी छोटी सी कहानी है ।
जो बात कह ना सके हम उसको ,
आज वो बात उसको बतानी है
हमने जो लिखी थी उसके लिए ,
वो गजल आज उसको सुनानी है ।
बसते है अश्क बस ये ही कहानी है ।।।
कहते है यार मेरे ,
अश्क गिरा दे उसके नाम का ,
देख फिर दुनिया कितनी सुहानी है ।
" कैसे गिरा दू इन अश्को को ...?
ये तो मेरे महबूब की निशानी है "
पलके भारी यादो से उसकी ,अब खुलती भी नहीं ...
आज आ जाए मौत तो वो भी सुहानी है
बस यही हकीकत , यही मेरी कहानी है । । । ।
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