Lovely world

Sunday, May 06, 2012

मंजिल देखे रस्ता .

अजनबी राहे , दूर है मंजिल ,
चलते चल , बढ़ते चल ,
जब तक कदम साथ दे
जब तक कदम साथ दे ,
साथ दे ना कोई , ना कोई हाथ दे ,
बढा खुद के हौसले को ,
सड़क का छोर पाना है
राहें कटती ही नहीं , दूरी बढाती ही जाए ,
लम्बा ये सफ़र काटे ना कट पाए
मंजिल खड़ी देखे रस्ता राही का ,
देखे कब आकर वो मुझे गले लगता है
थक कर रुक ,
रुक कर मुड़ जाता है,
या फिर दे क़दमों को हौसला ,
मेरी ओर चला आता है
चल राही ,चलता रह तु,
थकाना ना तु , डरना ना तु ,
अब तो उदय हुआ है तेरा ,
मंजिल की राहों पर आज ही तो पड़ा है पाँव तेरा
या हो काटें , या हो छाले ,
गिरता पड़ता खुद को तु ही संभाले
सर उठा कर देख मेरा साया ,
वापस ना लौटा जो इतना करीब आया ,
तोड़ सारे बंधन को ,
मेरी ओर चला ,
चलते आना है तुझको मुझ तक ,
मैंने ही है तुझको अपना अभिमान चुना



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