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Friday, May 11, 2012

आमिर

आमिर

कुछ ऐसी घटनाये भी होती है , जिनपर कभी ऐसा भी विश्वास नहीं होता है की ये भी हो सकता है बुद्धि तो ये मानने पर तैयार ही नहीं होती है पर जो इन् आँखों ने अपने सामने होते हुए देखा है उसे झुठलाया भी नहीं जा सकता सारी तर्क शक्ति इन घटनाओ का व्याखान देने में असमर्थ हो जाती है ऐसी चीजों का आपके साथ होना जो प्रत्यक्ष है पर दूसरी ही क्षण पता चलना की ऐसा तो कभी हो ही नहीं सकता
मेरे साथ भी कुछ ऐसा ही घटित हुआ जिसकी कल्पना केवल कल्पना में ही की जा सकती है परन्तु जो कुछ हुआ उसे नाकारा भी नहीं जा सकता है
मेरी पहली पोस्टिंग चेन्नई में हुई थी मै अपने सारे दोस्तों से दूर चेन्नई में पोस्टेड था जहा की मेरे सारे दोस्त जो कॉलेज में थे सभी अपने अपने घरो के पास ही गए थे मूलतः मै बिहार का निवासी हूँ घर से कुछ १५-२० किलोमीटर की दूर पर ही इंडिया-नेपाल का बोर्डर पड़ता है पर सुरुआती दिनों में जब नेपाल में राज्साशन था तब बोर्डर से इधर उधर आने जाने में कोई ज्यादा मुश्किले नहीं थी बोर्डर के आस पास के लोग अपने रिश्ते -विवाह या तो भारत में या नेपाल में ही किया करते थे जिस कारण कभी ऐसा जान नहीं पड़ता था की भारत और नेपाल अलग अलग है बस एक नाम की पुलिश चौकी भारत की सीमा पर और एक नेपाल की सीमा पर होती थी
आमिर भी उन् दिनों मेरे साथ ही हमारे स्कूल में पढ़ता था वो नेपाल का रहने वाला था यहाँ वो अपनी नानी के यहाँ रहता था हमारी दोस्ती कुछ दोस्ती की हद से ज्यादा ही थी हम दोनों में आपसी भाई जैसा प्यार था मै हिन्दू धरम का और आमिर इस्लामिक इस बात को लेकर कई बार बाते भी उठती थी की मैंने अपने संस्कार और लक्षण भुला दिए उन् दिनों का माहौल ही कुछ ऐसा था पर हमारी दोस्ती में कोई कमी नहीं आई
धीरे धीरे हम बड़े होते गए , उम्र दर उम्र दोस्ती भी खिलती गई। यहाँ तक की आमिर के घर वाले तो मुझे अपना ही मानने लगे थे जब भी कभी छुट्टियाँ होती मै आमिर के साथ नेपाल चला जाता था उसकी अम्मी और बहन तो मुझे अपना ही जानने लगे थे। मुझे भी वो अपना ही घर लगाने लगा
हम आगे की पढाई करने के लिए पटना गए वह कुछ दिन तो सब ठीक रहा फिर एक दिन आमिर ने मुझसे कहा की उसे कुछ जरूरी काम से घर जाना होगा घर से तार आया है मैंने भी कहा की ऐसी बात है तो तुम्हे जाना चाहिए कुछ दिनों बाद जब वो वापस लौटा तब उसने कहा की नानी का इंतकाल हो गया है और मामा उसे अपने पास नहीं रखना चाहते अम्मी की भी तबियत कुछ ठीक नहीं है तो वो वापस नेपाल जा रहा है शायद आब वो यहाँ नहीं आएगा इतना ही कह कर वो अपना सामान ले कर चला गया।उस दिन के बाद से आज तक मेरी उसकी कोई मुलाकात नहीं हुई मै भी अपने में इतना खो गया की खबर लेना भी भूल गया

एक दिन मै ड्यूटी से रात को जब कमरे में आया तो मुझे फर्श पर दो ख़त मिले एक तो घर से आया था और दूसरा जिसपर भेजने वाले का कोई पता नहीं था पर ख़त पर मुहर तो हमारे ही शहर की थी मैंने पहले घर का ख़त खोला और पढ़ने के बाद दूसरा बड़ी इत्मिनान के साथ खोला कहत को देख कर मै समझ गया की ख़त किसने लिखा है
ख़त में लिखा था : भाई जान आप तो हम लोगो को शायद भूल ही गए ऐसी भी क्या खता कर दी हमने की पिचली बार जब आप घर आये तो हमारी खबर भी नहीं पूछी आप और भाई जान दोनों एक ही तरह के हो इतना ही पढ़ के मै समझ गया की ख़त हिना ने लिखा है मेरी तो खुसी का ठिकाना नहीं रहा मैंने झट से पीछे के पन्ने पलट के देखे की कही आमिर ने कुछ लिखा होगा पर ऐसा नहीं था मै सोचने लगा की हिना को मेरा पता कैसे चला। तो आगे पढने पर पता चला की हिना की शादी हमारे पड़ोस के गाँव के ही मौलवी के लड़के के साथ हुई है वो किसी काम से जब यहाँ आई थी तो मेरा पता मेरे घरवालों से ले गई थी उसने बहुत सारी बाते लिखी थी और ये भी बताया की आमिर का निकाह अगले महीने की आखरी तारीख को तय हुआ है आपको आना होगा

मेरे तो पैर जमीं पर ही नहीं टिक रहे थे की आज इतने दिनों बाद ( साल ) बाद आमिर की खबर आई मन ही मन मै शर्म से पानी पानी हो रहा था की मैंने उसकी आज तक कोई खबर नहीं ली
घर पर भी चिट्ठी दाल दी की अगले महीने मै रहा हूँ आमिर को भी ख़त दाल दिया और अपने ऑफिस का फोन नंबर भी लिख दिया कुछ दिनों बाद ऑफिस में आमिर का फ़ोन आया और फिर उसने मुझे अपनी शादी पर घर आने को कहा उसने मुझसे आने का वादा लिया की मुझे जरूर आना होगा शादी नेपाल से है और नेपाल में ही होगी मैंने कहा मै जरूर आऊंगा
समय करीब आता गया फिर मै भी कुछ खरीद-दारी करने के लिए मार्केट जाने लगा जब भी कुछ आमिर -अम्मी और हिना के लिए लेने की सोचता तो पुराने दिन याद आने लगते जाने से एक दिन पहले मैंने अंतिम खरीद-दारी की जिसमे आमिर के लिए एक बहुत अच्छी घडी खरीदी पर लेने के साथ साथ वो मेरे हाथ से छुट कर गिर पड़ी और टूट गई हमारे घर में तो इससे अपशगुन मानते है पर मैंने इसकी कोई परवाह नहीं की और दूजी घडी ले कर पैक करवा ली
ऑफिस से पूरी छुट्टी नहीं मिली तो पहले मैंने सोचा की नेपाल चल जाऊ फिर वापस में घर में रहते हुए चले जाऊंगा घर वालों ने भी यही कहा
इन् दिनों नेपाल में मओवादिओं का बड़ा ही खौफ था वो रजा के खिलाफ जगह जगह हमले कर रहे थे बोर्डर पर भी माहौल कुछ ज्यादा सही नहीं था फिर भी मै चल पड़ा दो दिन के लम्बे सफ़र के बाद मै नेपाल बोर्डर पर इंडियन रेलवे के अंतिम स्टेशन पर पहुंचा शाम होने को थी मैंने सोचा की रात होने से पहले नेपाल तो पहुँच जाऊंगा। मै एक रिक्शा लेकर नेपाल बोर्डर तक तो चला गया जब नेपाल चौकी पर पहुंचा तो पता चला की माहौल ख़राब होने के कारण रात को बस नहीं चल रही है और वहा रात को रुकने भी नहीं दिया जाता मै दुविधा में पड़ गया आगे काफी दूर जाने के बाद आमिर का गाँव आएगा और रात को कोई सवारी भी नहीं है पैदल जाना भी ठीक नहीं और चौकी पर रुकना भी मना है बहुत देर सोचने के बाद और कुछ नहीं सूझा मैंने सोचा की अभी कोई ज्यादा शाम तो हुई नहीं है क्यों ना चल पड़े देर रात तक तो पहुच ही जाऊंगा मै करीब बजे वहा से गाँव को चल पड़ा रह रह कर पुरानी बातों में खो जाता और धीमे कदमो से आगे बढ़ने लगा। पास में सिर्फ एक बेग था जो कुछ भरी नहीं था तो चलने में भी कोई मुश्किल नहीं हो रही थी मन ही मन आमिर को याद करते बढ़ रहा था की एक आवाज़ आई " गए भाई जान , कब से आपकी रह देख रहा था " आवाज़ जानी पहचानी सी लग रही थी पर जब पीछे देखा तो कोई नहीं था मै कुछ हैरान सा था की किसने आवाज़ दी जैसे ही सामने मुदा मै एक पल को तो डर गया फिर गहरी सांस छोड़ते हुए बोला "तुम ! "
आमिर मेरे सामने सफ़ेद कुरते-पैजामे में और सर पर एक सफ़ेद टोपी डाले हुए खड़ा था मैंने झट से उसे गले लगाया और बोला तुम्हे कैसे पता चला की मै आज आने वाला हूँ ?
मै तो ना जाने कब से तुम्हारी रह देख रहा हु की तुम्हारा दीदार कब होगा ? बहुत समय लगाया आने में। आमिर ने कहा मैंने कहा कोई बात नहीं आब गया हूँ जी भर कर दीदार कर लेना
और घर पर सब खैरियत से है ? मैंने पुछा आमिर ने कुछ सुना नहीं या फिर जान कर जवाब नहीं दिया पता नहीं
हम धीमे कदमो से आगे बढ़ने लगे उसने कहा बेग भरी होगा मै ले लेता हूँ मैंने कही कोई बात नहीं और बेग कंधे पर जैसे था वैसे ही रहने दिया तुम मिल गए अब्ब तो सारी मुस्किल हल हो गई और क्या कर रहे थे यहाँ इतनी रात गए " तुम्हारा ही इंतजार। "फिर से उसने यही जवाब दिया
शुकर है खुदा का की तुम रात को ही चल पड़े वरना दिन को फिर मुलाकात नहीं होती आमिर ने कहा
उसकी बाते कुछ अजीब सी लग रही थी और वो मुझसे कुछ दूर दूर चल रहा था ऐसा तो हो नहीं सकता था की आमिर और हम एक साथ इतने दिनों बाद मिले और इतने दूर दूर रहे पर मैंने सोचा हो सकता है समय के साथ साथ बहुत कुछ बदल जाता है फिर रस्ते भर मै पुरानी बाते ही करता रहा और वो बस मेरी और देखता रहता और मुस्कुराता रहता।
रास्ते में एक जामुन का पेड़ था और मौसम भी जामुन का था मैंने कहा यार जामुन की खुसबू रही है उसने कहा मुझे पता है तुझे जामुन से बड़ा प्यार है खाना है जामुन मैंने सर तो हिलाया पर फिर कहा तुम्हे पता नहीं जामुन पर भूत होते है रात को जामुन के पेड़ को नहीं छेरते है याद नहीं नानी क्या कहती थी ?

हाँ पता है मुझे मै भी तो भूत हूँ मै हंसने लगा और कहा तो ठीक है भूत साहब जाओ ले आओ वो झट से पेड़ पर चढ़ गया और कुछ जामुन तोड़ कर निचे गया और मुझे कहा खाओ , तभी मैंने देखा दो आदमी दूर पेड़ के पास खड़े है मै दर गया मुझे लगा जैसे भूत हो मैंने कहा वो देखो। आमिर उनके पास गया और कुछ बात कर के गया मैंने पुछा कौन थे वो उसने कहा जामुन के पेड़ के भूत मै हंस कर कहा क्यों डरते हो तुम्हे पता है की मै भूत नहीं मानता बता भी दो कौन थे ? कही पेड़ के मालिक तो नहीं थे ? उसने हामी में सर को हिलाया
बातो ही बातो में कुछ दूर से मुझे दूर से कुछ लोग आते से महसूस हुए वो कुछ ज्यादा से थे हाथ में बड़ी टोर्च और पास में बन्दुक भी थी मै समझ गया हो ना हो ये माओवादी ही है जो रात कोई कही जा रहे है चारो तरफ बस बांस के पेड़ से बहरे जंगल थे मै डर गया मैंने कहा आमिर शायद माओ रहे है ? क्या करे ?
देखा तो आमिर नहीं था वह बस मै अकेला खड़ा था मै काफी डर गया तब तक में उन लोगो ने मुझे पकड़ लिया मुझसे पूछताछ करने लगे उन्हें शक हो रहा था की मै पुलिश का आदमी हूँ मैंने साड़ी बात बता दी की मै कहा से आया हूँ और क्यों आया हूँ उन्होंने मुझे पकड़ लिया और कहा ये इंडियन है इसे पकड़ कर हम आपनी मांगे मंगवा सकते है ? सब ने मुझे पकड़ लिया और ले जाने लगे मै जोर से चिल्लाने लगा तभी देखा आमिर और उसके साथ कोई और लोग बॉस के पेड़ को कस कर अपनी और ताने खड़े है और देखते जी देखते उन्होंने उसे झटके के साथ चोर दिया मै ये सब देख रहा था जैसे ही उन्होंने बॉस को छोड़ा मै मै जमीं पर लेट गया , देखते ही देखते बस के चोट से सारे लोग घायल हो गए .और लड़खड़ा कर इधर उधर भागने लगे फिर आमिर मेरे पास आया और बोला तुम ठीक हो मै उसे देख कर अब्ब कुछ डरने सा लग गया मैंने पुछा वो लोग कोन थे जो तुम्हारे साथ थे और कहा चले गए
उसने कहा की वो मेरे दोस्त थे यही आस पास रहते है , चले गए वो कुछ छुपा रहा था। फिर अचानक एक माओ ने गोली चला दी ,उसी समय आमिर ने मुझे धक्का दिया और खुद सामने गाया मैंने देखा की उसी गोली लग गई है , लेकिन उसने उसी तरह बस की टहनी को मोड़ा और झटका दिया की बन्दुक उसके हाथ से छूट गई वह भाग गया मै आमिर के पास भाग के आया और कहा तुम ठीक तो हो तुम्हे तो गोली लगी है उसने कहा नहीं मै ठीक हूँ और गोली मुझे नहीं लगी है मै बच गया

डरते सहमते कभी तेज़ कदमो से तो कभी धीरे धीरे हम बढ़ने लगे गाँव गया मैंने कहा देखो गाँव गया उसने सर हिलाया फिर कहा मुझे कुछ काम याद गया है मै जा रहा हूँ तुम घर जाओ ,अम्मी और हिना को तुम्हारी अभी बहुत जरूरत है मै कुछ समझा नहीं मैंने कहा।
कुछ नहीं इतना ही कह कर आमिर मुझे गई की सीमा में लाकर वापस मुद गया और बिना पलते अँधेरे में चला गया
मै घर पहुंचा वह देखा तो घर के आगे मैदान में बहुत से लोग सो रहे थे मैंने सोचा शादी का माहौल है सम्बन्धी आए हुए है मैंने बिना जोर की आहट किये घर का दरवाजा खटखटाया अन्दर से किसी ने दरवाज़ा खोला मैंने देखा हिना थी वो मुझे देखते ही मुझसे लिपट कर रोने लगी मै कुछ समझा नहीं मैंने सोचा इतने दिनों के बाद मिली है तो शायद .... अन्दर मुझे ले जाकर बोली रात बहुत हो रहे है आप अभी सो जाए कल सुबह बात करते है एक कमरे में हिना ने बिस्तर लगा दिया मै सो तो गया पर नींद नहीं आई दिल में एक बैचैनी सी थी सुबह बजे ही आजान के समय मै जगा ही था मेरे पास हिना आई और फूट फूट कर रूने लगी मैंने कहा पगली क्या बात है ? कुछ तो बताओ ? वो कुछ ना बोल सकी और हाथ पकड़ कर कर अम्मी के पास ले आई दोनों फूट फूट कर रोने लगे। मै कुछ बोलता उससे पहले अम्मी रोते रोते बोल पड़ी आमिर हमें छोड़ कर चला गया उसका इंतकाल हो गया मै अचानक सदमे में गया रात तक तो आमिर ठीक था अचानक ये क्या हो गया ? मै झट से उठ कर आमिर के कमरे में गया कमरा खली था कोई भी वह नहीं था मेरे पीछे हिना भी दौड़ती आई और रोती हुई बोली
कल सुबह अचानक भाईजान को दौरा पड़ा और दो उलटिया आई फिर वो गिर पड़े डॉक्टर को बुलाया पर तब तक बहुत देर हो चुकी थी और फिर रोने लगी।
पर मै ...... मै कुछ बोलता की मेरी जुबा बंद हो गई आँखों से नीर बहने लगे मै तो जैसे सदमे में गया था।
मैंने तो जैसे अपना अनमोल हीरा खो दिया था एक मूरत की तरह बन गया
किसी तरह खुद को संभाला पर जो कुछ मेरे साथ हुआ मै जान कर हैरान था दिनों के बाद जब सारे सम्बन्धी चले गए तो मै चाह कर भी जा ना पा रहा था मै और हिना ही बस बचे थे मै वहा रुक ना सका और किसी को बताने की भी हिम्मत नहीं हो रही थी को मैंने आमिर को उस रात देखा , देखा ही नहीं उसने मेरी जान भी बचाई अगले दिन मै चला आया आने से पहले आमिर की कब्र पर फूल ले कर गया गया। वहा पहुंचा तो देखा ये हो तो ही जगह थी जहा रात को आमिर मुझसे मिला था मेरी आँखों से आंसू बहने लगे
मैंने अकले में जाकर काजी साहब को सारी बात बताई उन्होंने कुछ मन्त्र और ध्यान लगाने के बाद कहा बेटा आमिर जाने से पहले तुम्हारी राह देख रहा था , तुममे उसकी रूह बसी थी वो तुमसे मिले बिना कैसे जा सकता था ?

फिर मै बिना कुछ बोले वहा से उठ आया बोलने की क्या ,मेरे तो सोचने की शक्ति भी जाती रही

आज भी मेरी बुद्धि ये मानने को तैयार नहीं है की जो कुछ हुआ वो सब सच था पर जो कुछ मेरी आँखों के सामने हुआ उसे झुठलाया भी नहीं जा सकता

लेखक
अंजनी कुमार भार्गव.

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