दामन में काटे ही मिले,
दुआ है !
तेरा चमन फूलो से
सजता रहे ।
गुलिस्ता महके नव - कलियों ,
नव- रंग , नयी -सुगंध से ,
खातिर तेरे ,
हर मकरंद से ,
अब बैर खाया है ।
देख होठो पर तेरे ,
लहर मुस्कान की ,
मेरा हर गम ,
मेरी हर चिंता ,
हर मेरा दर्द ,
तेरी उस मंद ,चंचल हंसी ने
भुलाया है ।
अब ना जाने देना होठो से ,
इन तबस्सुम की
लडियो को ,
मेरे बेचैन से ,
इस चैन का,
चैन !
तेरी इन्ही मुस्कानों में समाया है !!
॥ भास्कर ॥
दुआ है !
तेरा चमन फूलो से
सजता रहे ।
गुलिस्ता महके नव - कलियों ,
नव- रंग , नयी -सुगंध से ,
खातिर तेरे ,
हर मकरंद से ,
अब बैर खाया है ।
देख होठो पर तेरे ,
लहर मुस्कान की ,
मेरा हर गम ,
मेरी हर चिंता ,
हर मेरा दर्द ,
तेरी उस मंद ,चंचल हंसी ने
भुलाया है ।
अब ना जाने देना होठो से ,
इन तबस्सुम की
लडियो को ,
मेरे बेचैन से ,
इस चैन का,
चैन !
तेरी इन्ही मुस्कानों में समाया है !!
॥ भास्कर ॥
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