Lovely world

Friday, June 07, 2013

दो पल जीने की राहो से .....!!

 दो पल जीने की राह ने ,
क्या- क्या दिखलाया है !!
अपनो को अपनो की खातिर ,
हर तरह ...!
अपनो से गैर बनाया है !
कर .....!!
छोटे से अभिमान का ,
बड़े- बड़े औदो ने चुकाया है । 
डंके की चोट पर बजता ,
उसका  अटखेल उड़ाया है । 
दो पल जीने की राहो ने 
जाने  क्या - क्या दिखलाया है  !!!

प्रेम न बसता , द्वेष न बसता ,
द्रवित ह्रदय ना हो पाया ,
व्यर्थ ही !
जाने क्या खोता , क्या पता ,
पथिक ने हर भाव से खुद को गवाया है ।
 जीता मृत भावो में हर दम 
व्याकुलता का साया है !!!
शायद ! ये ही दो पल ...
जीने की राहो ने 
हर पल में , पल पल मरना दिखलाया है !!!!
                                                                                         ॥ भास्कर ॥


No comments:

Post a Comment