पल में रोना पल में मुस्कुराना
इश्क है एक अनजाना एहसास
जब तक हो ना लगता , छलिया
क्या होता है .....बिना आह किसी पे मिट जाना ।।
ना चाह किसी की ,
ना लगे पता दिवस का
जले हृदय , ना जिह्व्हा पे प्यास
दर्द विछोह का , मिलन का रास ।
इश्क किया तो मैंने जाना ।।
मन प्रियतम वर सबसे सुहाना
चाहे पतंगा लौ में जल जाना ।
विरह ऐसा .....
जलचर जैसे बिन पानी ,
आए समीप जब ,
अधर भूल जाए मुस्काना ,
इश्क किया तो मैंने जाना
भरी अनोखी और मस्त अदाए ,
छोड़ जग की , प्रिय के सपनो में खो जाना ।। ।
जब तक हो ना लगता , छलिया
हो जाए तो फिर ना किसी की आस ।
इश्क किया तो मैंने जाना ...क्या होता है .....बिना आह किसी पे मिट जाना ।।
ना चाह किसी की ,
ना लगे पता दिवस का
जले हृदय , ना जिह्व्हा पे प्यास
दर्द विछोह का , मिलन का रास ।
इश्क किया तो मैंने जाना ।।
मन प्रियतम वर सबसे सुहाना
चाहे पतंगा लौ में जल जाना ।
विरह ऐसा .....
जलचर जैसे बिन पानी ,
आए समीप जब ,
अधर भूल जाए मुस्काना ,
इश्क किया तो मैंने जाना
भरी अनोखी और मस्त अदाए ,
छोड़ जग की , प्रिय के सपनो में खो जाना ।। ।
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