पवन बसंती
ऐ ! पवन बसंती तू कहाँ चली ?
इठलाती ,बलखाती , झोकों के संग संग
घुमती फिरे तू हर गली गली
पवन बसंती तू कहाँ चली ??
लिए मोहित खुश्बू का संग ,
लाये संध्या सुबह अद्भुत सुगंध ,
पावन चंचल थिरकती जाए ,
मन नाच उठे ले संग मृदंग ,
मधुबन महके लाए बहार ,
आने से तेरे यहाँ
बगिया मेरी , बनी मधुबनी ।
ऐ ! पवन बसंती तू कहाँ चली ???
द्वारा उसके तू अद्भुत रचित,
विधाता देता तुझको यूं सूरत,
कावेरी सःसदानीरा ,शिवानी की मूरत,
चलती चाल श्वेतांगी , मुस्काती ,
बावरी बहे तू पुष्प -पत्र बरसाती ,
अम्बर - बसुन्धरा पावन बनाती ,
तू आई कहाँ से ? किस-किस से मिली ?
कहाँ घर-बार तेरा ?
सर्वत्र तू झूमती मिली ॥
ऐ ! पवन बसंती तू कहाँ चली ???
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