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Monday, April 27, 2020

आई रानी बसंती आई

कलकल कलकल करती नदियां 
सनन सनन सन पुरवाई
झर झर झर झर गिरे है झरने
ठंडी ठंडी फिजा है आई।

कुकू कुकू कूके कोयलिया
घनघोर घटा घिर आई।
सर सर सर सर बहे बसंती 
मयूरा ने पंखे फैलाई

लहर लहर लहराई फसले
घनन घनन घन  बदरा छाए
सहम सहम कर बोले किशनवा
ठहर ठहर इंदर भाई
काट लूं मैं गेहूंआ दाना
खुल के ले फिर अल्हड़ अंगड़ाई।।

गुनगुन करता गाए भंवरा
चुन चुन करती चिड़िया आई
हरे-हरे पल्लव व मंजर
मधु सुगंध से धरती भर आई।

घून घून करते शैतान भ्रमर
मस्त मंद सुगंध फूलों की छाई
भन भन भन भन्नाते बर्रे
तितली शहद चुराने आई

मद्धम मद्धम महके महुआ
छन छन कर धूपा आई
लहर लहर लहराई सरसों
खेतों में हरियाली आई।

कोयल संग पपीहा गाऐ 
खालिहानो ने दौनी गाई
कमर कसे खेतों में गुजरी
अन्नपूर्णा घर ले आई

भरते भरते भरे भंडारा
नाच नाच बैसाखी गाई
रंग रंग से भरे हैं चेहरे
फगुआ की बहार है छाई

रीत रीत के परब त्यौहारे
रंग बिरंगे नाच नगाड़े
बिहू गिद्दा और भवाई
राधे रानी संग नाचे कन्हाई।

जीवन का खुश रंग दिखाई
धरती पावन मधुबन बनाई
मायूसी है दूर भगाई
भांत भांत की चुनरीया ओढ़े
आई रे आई
रानी बसंती आई।
आई रे आई
रानी बसंती आई।
                                            ।। भास्कर।।

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