Lovely world

Tuesday, April 21, 2020

सोचा करे

मिल गया है मुझे ,
अब ख़ाक क्या सोचा करे ।
 
हल्की सी बारिश में ,
अब मन को क्यों फिका करे ।
 
क्यों करे चाहत जवाहर की ,
शीत में मोती
धारा पर यूं हीं बिखरा करे ।।

कोहरे की चादर में था जो 
अंगड़ाती धूप में 
अब क्यों सोचा करे ।।

इस गुलाबी सी उषा से 
काहिर मन- बदन को सींचा करे ।

मिल गया है मुझे "भास्कर"
ख़ाक सर्द से ठिठुरा करे ।।

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