Lovely world

Monday, May 18, 2020

इस तरफ था मै

इस तरफ था मै खड़ा
तू खड़ा उस ओर था

मैं जहां था रूका
मंजर वहां का झकझोर था

उस तरफ थी वादियां हंसी 
यहां तो बस सैलाब का ही शोर था 

खुश था तू दूर जाकर मुझसे
पर उन आंसुओं की वजह कोई और था।

इस तरफ था मैं खड़ा
तू खड़ा उस ओर था।

तुम तो थे आलम फिजा में
खिंजा का आलम यहां झंझोर था।

सर्द वादियों में भी तपन थी सिसकीयों कि
बिखरा हुआ दिल, मातम से सराबोर था।

छूट रहा था उसका और मेरा साथ
बहार ने ना जाने लिया कैसा मोड़ था ।

इश्क पाने को निकले थे  रोशनी से
पर आफताब कुर्बानियों में ही मगरूर था।

इबादत थी जिसकी नसीहत सभी को
मैंखाने में पड़ा आज वो बेहसूर था ।

किस तरफ था मैं खड़ा?
तकदीर ने लिया कैसा मोड़ था !  

इस तरफ था मै खड़ा
क्यो  तू खड़ा उस ओर था!

                                         ।।भास्कर।।

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