मैं मजदूर तुम्हारा
मैं मजदूर तुम्हारा मैं भी एक इंसान हूं
जीता नहीं इच्छा से अपनी
माया का रंक महान हूं
सोता हूं अपनों के ख्वाबों की खातिर
पल-पल मरता शाप समान हूं
हूं मैं भी इसी मही का कंकड़
रखता शक्ति का थोड़ा कम अभिमान हूं।
मैं मजदूर तुम्हारा मैं भी एक इंसान हूं।।
नहीं चाहता, चाह तुम्हारे जैसी
बस मांगता थोड़ा सा सम्मान हूं।
माना अपनी तुच्छ वर्ण श्रृंखला
पर कुटुंब का अकेला भरतार समान हूं।
बस दे दो अपना तनिक सहारा
दुर्भाग्य से लौ की बुझी कालिख बेकाम हूं।
दाता तुम ही म्हारे
मैं अकिंचन, तुम मेरे प्रधान हो
मैं मजदूर तुम्हारा मैं भी एक इंसान हूं।।
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