समुंदर मे रहने वालो , माना सारी नदिया तेरे पास है ,
तालबो के ही मालिक ही सही माना, पर प्यासो की आस है ।
दौलत से ही मिलती अगर जन्नत, तो फिर भला कैसे वो कहते..
रब तो है साथ हमारे और इश्क़-ए- खुदाई भी हमारे
पास है ॥
माना नूर है तेरे कदमो मे ,
तो कहकशा भी मेरे पास है ,
तु परी है जन्नत की तो खुश्बु
मे हम भी पलाश है ।
ओ ! महलो के मालिक ,
छोटे ही आशिया वाले ही सही
पर अपनो की आस है ॥
तालबो के ही मालिक सही माना, पर प्यासो की प्यास है ।।
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