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Wednesday, September 02, 2015

मुकदमा ..

 
। मुकदमा ।


नज़रो ने मेरी , सुरत पर उनकी
एक मुकदमा कर डाला ।
लवली- लवली आरोपो का
अम्बार लगा डाला ।
निगहे लिखती अपनी चार्ट्शीट मे
छिप छिप कर उनको
ताकने का प्यारा गुनाह ,
उस चेहरे ने करवा डाला ॥
कदम जो अभी खडे थे
सिर्फ लाईब्रेरी कि
चौखट तक ही
एक मुस्कुराह्ट ने उनकी
गर्ल्स होस्ट्ल तक पीछा करने का 
गुनाह करवा डाला ।

सपनो के कोरट मे चल रहा था
मुकदमा जोरो से ,
तभी ‍
वकील ख्याल ने एक
सवाल कर डाला,
सिर्फ एक सोच ने उसकी , क्यो
तेरे रोम रोम को महका डाला ?
मन करते  जब तक वकालत
जज ने फैसला कर डाला ।
जज्बातो को रख नज़रो मे
मामला 
दिल वाली सुप्रीम कोर्ट मे रेफर कर डाला ॥     

                                           ।। भास्कर ॥

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