शिकायते
क्यो खबर ना देते वो अपनी ,
जिनको हमने अपनी राते उधार दी
।
सो गए ना जाने वो किनके सपनो
मे.......
क्यो बसी बस्ती उजाड दी ॥
मैने
तो बस दो पल मांगा था उनका ,
जीने
कि खातिर
क्यो
उनको ये भी ना गवरा हुआ
जिनपे ये जिंदगी वार दी ॥
बस तनहा ही छोड क्यो जाते हो
दो यादो के नज़राने तो दे जाते
साथ जीने का ना सही
जीने के बहाने तो दे जाते
कट जाती ये जिंदगी , होठो को सी कर
पलखो को मिंचे ,तेरे सपनो मे जी जाते ,
ना उठ्ता फिर उस मदहोश निंद
से ,
तेरे ख्वाबो के आगोश मे हमेशा
को सो जाते ............॥॥॥॥
॥ भास्कर ॥
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